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किसान भाइयों, अगर आप इस साल धान की खेती करने की योजना बना रहे हैं या पहले से ही धान की खेती कर रहे हैं और अधिकतम उत्पादन पाना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। यहां हम आपको बताएंगे वे छह महत्वपूर्ण बातें, जिनका पालन करके आप अपनी धान की फसल से शानदार और रिकॉर्ड पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। इन बातों का पालन न करने पर भले ही आपने बेहतरीन वैरायटी चुनी हो, लेकिन फसल का उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं होगा।

समय पर नर्सरी की तैयारी

धान की अच्छी खेती की शुरुआत नर्सरी से होती है। आपको नर्सरी समय पर और सही विधि से डालनी चाहिए ताकि बीजों का जमाव अच्छा हो, पौधे मजबूत बनें और किसी प्रकार की बीमारी न लगे। नर्सरी की तैयारी के लिए बीज शोधन, मिट्टी की तैयारी और उचित सिंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। एक अच्छी नर्सरी ही आगे चलकर मजबूत और उत्पादक फसल की नींव रखती है।

समय पर रोपाई (ट्रांसप्लांटिंग)

जब आपकी नर्सरी लगभग 20 से 25 दिन की हो जाए, तो उसमें से पौधों की रोपाई कर देनी चाहिए। समय पर रोपाई करने से पौधों में फुटाव बेहतर होता है, कले अधिक निकलते हैं और पौधे स्वस्थ बने रहते हैं। इससे उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है। देर से रोपाई करने पर पौधों में कम फुटाव होता है और उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है।

पहली खाद का महत्व

धान की खेती में पहली खाद बेहद महत्वपूर्ण होती है। पहली खाद की गुणवत्ता और समय पर डाली गई खाद ही फसल की पैदावार को तय करती है। किसान भाइयों, पहली खाद में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलन रखना आवश्यक है। इससे पौधों की प्रारंभिक वृद्धि तेज होती है और वे बीमारी तथा कीट प्रकोप से बेहतर लड़ पाते हैं।

रोग और कीट नियंत्रण

धान की फसल में बीमारियों और कीटों का प्रकोप अक्सर देखा जाता है। पंखी, तना छेदक, माहू, और इल्लियों का समय पर नियंत्रण न किया जाए तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए, रोगों और कीटों के लक्षण दिखते ही तुरंत उचित स्प्रे करना चाहिए। इससे न केवल नुकसान से बचा जा सकता है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।

बालियों के निकलते समय सिंचाई

धान की फसल में बालियों के निकलते और दाने भरते समय सिंचाई का विशेष महत्व होता है। यदि इस समय पर सिंचाई व्यवस्था अच्छी रखी जाए, तो बालियां लंबी बनती हैं और दाने भरपूर आते हैं। इस अवस्था में पानी की कमी उत्पादन पर सीधा असर डालती है, इसलिए ध्यान रखें कि खेत में नमी बनी रहे।

वैरायटी की सही जानकारी

धान की अच्छी पैदावार के लिए आपको चुनी गई वैरायटी की पूरी जानकारी होनी चाहिए। इसमें नर्सरी का समय, बीज की मात्रा, पकने की अवधि और संभावित उत्पादन शामिल हैं। सही जानकारी के बिना खेती में कई बार गलतियां हो जाती हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है।

धान की खेती में रिकॉर्ड उत्पादन के 6 सुनहरे राज़ और टॉप 5 उन्नतशील किस्में

टॉप 5 उन्नतशील धान की किस्में

अब हम बात करेंगे उन पाँच बेहतरीन वैरायटियों की, जो अधिकतम उत्पादन देने के लिए जानी जाती हैं और जिनमें रोगों का प्रकोप भी कम देखा जाता है।

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बायर एरीज 644 गोल्ड
यह किस्म काफी पॉपुलर है। इसकी नर्सरी के लिए 6-7 किलो बीज प्रति एकड़ चाहिए। यह किस्म 135-140 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है और 32-35 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन देती है।

पाइनेटर 27 पी 37
यह किस्म भी बहुत प्रसिद्ध है। इसकी नर्सरी के लिए 6 किलो बीज प्रति एकड़ की जरूरत होती है। यह किस्म करीब 135 दिनों में तैयार हो जाती है और लगभग 32-35 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन देती है।

कावेरी 468
कावेरी सीड्स की यह किस्म बेहतरीन है। नर्सरी के लिए 4-5 किलो बीज प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है। यह किस्म 140 दिनों में तैयार होती है और लगभग 32 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन देती है।

बायोसीड BH 21
यह किस्म भी शानदार है। इसके लिए नर्सरी में 6 किलो बीज प्रति एकड़ लगता है। यह किस्म 130-135 दिनों में पककर तैयार होती है और 30-32 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन देती है।

त्रिमूर्ति चेतक गोल्ड
बहुत लोकप्रिय किस्म है। नर्सरी के लिए 5 किलो बीज प्रति एकड़ की जरूरत होती है। यह किस्म 130 दिनों में तैयार होती है और 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन देती है।

निष्कर्ष

किसान भाइयों, धान की खेती में अच्छी पैदावार केवल अच्छी वैरायटी लगाने से नहीं मिलती, बल्कि समय पर नर्सरी, रोपाई, खाद प्रबंधन, रोग नियंत्रण और सिंचाई जैसे हर कदम पर सावधानी बरतनी जरूरी होती है। अगर आप इन छह महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखेंगे और बताई गई बेहतरीन किस्मों का चयन करेंगे, तो आपकी फसल निश्चित ही दमदार होगी और आपको रिकॉर्ड उत्पादन मिलेगा।

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