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आम की खेती करने वाले अधिकांश किसान हर साल यही कहते हैं कि पेड़ों में आम में मंजर तो खूब आते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में फूल झड़ जाते हैं या फिर फल सही से बन ही नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि मेहनत के बाद भी पैदावार कम रह जाती है। असल में इसका कारण कोई बीमारी या किस्म नहीं, बल्कि आम में मंजर आने के बाद की दो बड़ी गलतियां हैं, जिन्हें किसान अक्सर अनजाने में दोहरा देते हैं। यही गलतियां फूल टिकने नहीं देतीं, फल सेटिंग कमजोर कर देती हैं और कीट-रोगों का खतरा भी बढ़ा देती हैं। अगर समय रहते इन गलतियों को समझ लिया जाए, तो आम की उपज और गुणवत्ता दोनों में बड़ा सुधार किया जा सकता है।

आम में मंजर कब आते हैं और यह अवस्था क्यों अहम है

किसान मित्रों, आम का पौधा साल में केवल एक बार ही फूल देता है और यही अवस्था आम में मंजर कहलाती है। यह वह सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, जब पूरी फसल का भविष्य तय होता है। अलग-अलग किस्मों में मंजर आने का समय अलग होता है। जैसे दक्षिण भारत की किस्में सफेदा या बेंगनपल्ली में मंजर जल्दी आ जाते हैं, जबकि दशहरी और चौसा जैसी किस्मों में मंजर फरवरी–मार्च के आसपास आते हैं। कुल मिलाकर दिसंबर से मार्च के बीच अधिकांश क्षेत्रों में आम में मंजर देखने को मिलते हैं। इसी समय की गई थोड़ी सी गलती पूरे सीजन की पैदावार बिगाड़ सकती है।

आम में मंजर आते ही किसान कर बैठते हैं ये 2 भारी भूल, जान लें वरना नुकसान तय

पहली बड़ी गलती

आम में मंजर आने के बाद सबसे पहली और सबसे आम गलती होती है सिंचाई का गलत प्रबंधन। जैसे ही पेड़ों में मंजर निकलना शुरू हो जाए, उस समय पानी देना पूरी तरह रोक देना चाहिए। कई किसान इस डर से सिंचाई करते रहते हैं कि कहीं पौधा कमजोर न हो जाए, लेकिन यही सबसे बड़ी भूल साबित होती है।

जब आम में मंजर की अवस्था में पानी दिया जाता है, तो फूल झड़ने लगते हैं। कई बार मंजर की जगह नई हरी पत्तियां निकल आती हैं, जिससे फ्लावरिंग में देरी होती है। पौधे की ऊर्जा फूल और फल बनाने की बजाय वानस्पतिक वृद्धि में खर्च होने लगती है।

असल में इस समय पौधे को हल्का तनाव देना जरूरी होता है। यह तनाव वानस्पतिक वृद्धि को नियंत्रित करता है और ज्यादा फूल लाने में मदद करता है। जब फूल अच्छे से सेट हो जाएं और फल मटर के दाने के आकार के हो जाएं, तभी हल्की सिंचाई शुरू करनी चाहिए। खेत में पानी भरने की बजाय मिट्टी की नमी जांचना जरूरी है। सही सिंचाई प्रबंधन से आम में मंजर के बाद होने वाला फूल झड़ाव काफी हद तक रोका जा सकता है।

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दूसरी बड़ी गलती

आम में मंजर आने के बाद दूसरी बड़ी गलती होती है इस अवस्था में कीटनाशकों का छिड़काव करना। चाहे कीटनाशक हल्का हो या तेज, फ्लावरिंग स्टेज पर उसका गलत उपयोग सीधे फूल झड़ने का कारण बनता है। इससे भी बड़ा नुकसान यह होता है कि मधुमक्खियां और मित्र कीट फूलों पर नहीं आते।

आम एक क्रॉस-पॉलिनेटेड फसल है, यानी इसमें परागण के लिए मधुमक्खियों की भूमिका बेहद जरूरी होती है। अगर आम में मंजर के समय मधुमक्खियां खेत में नहीं आएंगी, तो परागण ठीक से नहीं होगा और फल सेटिंग कमजोर रह जाएगी।

अगर कीटों का प्रकोप ज्यादा हो, तो मंजर आने से पहले ही स्प्रे कर देना चाहिए। मंजर अवस्था में केवल नीले त्रिकोण वाले यानी ब्लू लेवल कीटनाशकों का ही प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि ये मधुमक्खियों और मित्र कीटों के लिए सुरक्षित होते हैं। इससे आम में मंजर के दौरान परागण प्रभावित नहीं होता।

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सही प्रबंधन से कैसे बढ़ेगी पैदावार

जब किसान आम में मंजर आने पर सही समय पर सिंचाई रोकते हैं और अनावश्यक स्प्रे से बचते हैं, तो फूल ज्यादा समय तक टिकते हैं। परागण बेहतर होता है, फल सेटिंग मजबूत बनती है और आम का आकार, स्वाद और गुणवत्ता भी सुधरती है। यही कारण है कि छोटे लेकिन सही फैसले लंबे समय में बड़ा लाभ देते हैं।

निष्कर्ष

अगर आप चाहते हैं कि इस साल आपके बाग में आम की अच्छी पैदावार हो, तो आम में मंजर आने के बाद होने वाली इन दो बड़ी गलतियों से जरूर बचें। सही सिंचाई प्रबंधन और मंजर अवस्था में कीटनाशकों का समझदारी से उपयोग ही सफल आम की खेती की कुंजी है। समय पर लिया गया सही निर्णय आपकी पूरी फसल को बचा सकता है।

FAQ: आम में मंजर

आम में मंजर आने के बाद क्या करना चाहिए?

मंजर आने पर सिंचाई रोकें और अनावश्यक कीटनाशक का छिड़काव न करें।

आम के पेड़ में मंजर कब आता है?

आमतौर पर दिसंबर से मार्च के बीच मंजर आता है।

आम के पेड़ में कौन सा खाद डालना चाहिए?

गोबर खाद के साथ फास्फोरस और पोटाश देना लाभदायक होता है।

आम का सबसे गंभीर रोग कौन सा है?

पाउडरी मिल्ड्यू (भभूतिया रोग) आम का सबसे गंभीर रोग है।

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