क्या आपने कभी सोचा है कि खेती करते हुए बिजली भी बनाई जा सकती है? सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन यह अब हकीकत बन चुकी है। एग्री वोल्टेक्स यानी खेत में सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन और उसी जमीन पर फसलों की खेती करना। यह तकनीक खेती को अधिक प्रोडक्टिव बनाने के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी का भी एक बड़ा समाधान है।
मैं किरण, उत्तराखंड की रहने वाली किसान, आज आपको इस आधुनिक और लाभकारी तकनीक के बारे में विस्तार से बताने जा रही हूं। इस टेक्नोलॉजी का उपयोग जापान, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में शुरू हो चुका है और भारत में भी यह धीरे-धीरे पांव पसार रही है। तो आइए जानते हैं कि एग्री वोल्टेक्स आखिर है क्या, यह कैसे काम करता है और इसके क्या-क्या फायदे हैं।
एग्री वोल्टेक्स क्या है?
एग्री वोल्टेक्स (Agri-Voltaics) एक ऐसी तकनीक है जिसमें खेतों में सोलर पैनल इस तरह से लगाए जाते हैं कि किसान जमीन पर खेती भी कर सकता है और ऊपर से बिजली भी उत्पन्न होती है। पैनल इस प्रकार सेट किए जाते हैं कि नीचे की फसलों को पर्याप्त धूप मिले, लेकिन तेज धूप से उन्हें नुकसान न हो। यह सोलर पैनल खेत की तरह एक प्राकृतिक छत का काम करते हैं, जिससे तापमान और नमी का स्तर संतुलित रहता है।
एग्री वोल्टेक्स कैसे काम करता है?
इस सिस्टम में सोलर पैनल को एक ट्रस्ट या संरचना पर ऊंचाई पर लगाया जाता है। पैनल की ऊंचाई, कोण और स्थान का निर्धारण इस प्रकार किया जाता है कि नीचे की फसल को पर्याप्त रोशनी मिल सके और किसान आसानी से काम कर सके।
इसमें IoT (Internet of Things) और सेंसर टेक्नोलॉजी का भी प्रयोग किया जाता है, जिससे यह पता चलता है कि किस समय कितनी रोशनी की आवश्यकता है, मिट्टी में नमी का स्तर कितना है और तापमान कैसा है। इस तकनीक से एक माइक्रो क्लाइमेट तैयार होता है, जो फसलों की ग्रोथ के लिए आदर्श होता है।
एग्री वोल्टेक्स के फायदे
सबसे पहला फायदा है उपज में बढ़ोतरी। रिसर्च के अनुसार, इस सिस्टम के जरिए फसलों की पैदावार 60% तक बढ़ सकती है। सोलर पैनल की छाया से मिट्टी ठंडी रहती है और नमी अधिक समय तक बनी रहती है, जिससे फसलें हीट स्ट्रेस से बचती हैं।
दूसरा फायदा है बिजली उत्पादन। किसान अपने खेत से खुद की बिजली बना सकता है, जिससे पंप, लाइट और कोल्ड स्टोरेज जैसी चीजें आसानी से चल सकती हैं। अगर अतिरिक्त बिजली बनती है, तो उसे ग्रिड में बेचकर किसान अतिरिक्त आमदनी भी कमा सकता है।
तीसरा फायदा है पानी की बचत। क्योंकि धूप सीधे मिट्टी पर नहीं पड़ती, वाष्पीकरण कम होता है और नमी अधिक समय तक बनी रहती है। यह प्रणाली लगभग 40% तक पानी की बचत कर सकती है।
चौथा फायदा है मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार। क्योंकि इस सिस्टम में रसायनों का कम उपयोग होता है और फसलों से जैविक पदार्थ सीधे मिट्टी में चले जाते हैं, इससे मिट्टी ज्यादा उपजाऊ और स्वास्थ्यवर्धक बनती है।
पांचवां फायदा है नियमित आय। अतिरिक्त बिजली बेचकर किसान हर महीने एक स्थिर इनकम प्राप्त कर सकता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
भारत और विदेशों में कहां हो रहा है प्रयोग?
विदेशों में जापान का ‘सोलर शेयरिंग’ प्रोजेक्ट काफी प्रसिद्ध है, जहां धान के खेतों में सोलर पैनल लगाकर बिजली और फसल दोनों में दोगुनी आमदनी हो रही है। फ्रांस का ‘फोर्ट एंड ब्लो’ प्रोजेक्ट सोलर पैनल्स और भेड़ पालन का अद्भुत संयोजन है, जहां भेड़ें घास खा लेती हैं और घास काटने की लागत बचती है।
अमेरिका की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स’ ने एक सोलर पार्किंग प्रोजेक्ट विकसित किया है जहां एप्पल ऑर्चर्ड भी हैं और पूरा सिस्टम 100% सोलर एनर्जी पर चलता है।
भारत में गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। कई स्टार्टअप और सरकारी संस्थान इस तकनीक पर रिसर्च कर रहे हैं और उम्मीद है कि जल्द ही यह तकनीक आम किसानों तक पहुंचेगी।
भारत में एग्री वोल्टेक्स का भविष्य
भारत एक ऐसा देश है जहां सूर्य की रोशनी भरपूर मात्रा में उपलब्ध है लेकिन खेती की जमीन सीमित है। ऐसे में एग्री वोल्टेक्स जैसी तकनीक क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यदि सरकार द्वारा सब्सिडी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए, तो यह सिस्टम किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी को भी बढ़ावा दे सकता है।
यह तकनीक खेती को स्मार्ट, टिकाऊ और लाभदायक बना सकती है। किसानों को इस ओर ध्यान देना चाहिए और यदि आप खेती से जुड़े हैं, तो एग्री वोल्टेक्स को जरूर अपनाने पर विचार करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: क्या हर फसल को सोलर पैनल के नीचे उगाया जा सकता है?
उत्तर: नहीं, कुछ फसलें जैसे पालक, धनिया, अदरक, हल्दी और साग वाली फसलें छाया में बेहतर उगती हैं जबकि धूप पसंद करने वाली फसलें इसके लिए उपयुक्त नहीं हो सकतीं।
प्रश्न 2: क्या सरकार इस पर सब्सिडी देती है?
उत्तर: कुछ राज्यों में सोलर पैनल सिस्टम पर 30% से 60% तक सब्सिडी दी जा रही है। इसके लिए आप अपने राज्य की कृषि विभाग या सोलर पंप योजना की वेबसाइट पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रश्न 3: इस तकनीक की लागत कितनी आती है?
उत्तर: लागत सोलर पैनल की संख्या, क्षेत्रफल और तकनीकी संरचना पर निर्भर करती है। आमतौर पर यह ₹5 लाख से ₹15 लाख के बीच होती है, लेकिन लंबे समय में यह निवेश लाभदायक सिद्ध होता है।
निष्कर्ष
एग्री वोल्टेक्स तकनीक भारत में खेती की दिशा बदलने की क्षमता रखती है। यह ना सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ा सकती है, बल्कि ग्रीन एनर्जी और जलवायु संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा सकती है। अगर आप खेती करते हैं और पर्यावरण के साथ-साथ अपनी कमाई बढ़ाना चाहते हैं, तो इस तकनीक पर जरूर विचार करें।
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