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यह तो हम सब जानते हैं कि अलग-अलग मौसम में अलग-अलग प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। जैसे ठंड में मक्के और बाजरे की रोटियां स्वाद देती हैं, तो गर्मियों में आम, लीची और तरबूज का आनंद लिया जाता है। इसी तरह हर मौसम की अपनी खेती होती है, जो न केवल मुनाफा देती है बल्कि खर्च भी कम होता है। आज हम जानेंगे साल के 12 महीनों में कौन-कौन सी फसलें उगानी चाहिए जिससे आपका मौसम भी साथ दे और आमदनी भी अच्छी हो।

जनवरी में लगाये जाने वाली फसले

जनवरी में मटर, पालक, गाजर और गेहूं जैसी रबी फसलें बहुत अच्छी तरह से उगती हैं। देर से बुवाई करने वाले किसान इस समय इन फसलों को आसानी से उगा सकते हैं। एक एकड़ में बीज, खाद और सिंचाई सहित कुल खर्च ₹8,000 से ₹12,000 तक आता है। इन फसलों की बाजार में मांग बनी रहती है, इसलिए मुनाफा भी निश्चित है।

फरवरी में लगाये जाने वाली फसले

फरवरी में आप सूरजमुखी, आलू और धनिया उगा सकते हैं। खास बात यह है कि सूरजमुखी की फसल सिर्फ 90 दिनों में तैयार हो जाती है। इससे किसान सनफ्लावर ऑयल बनाकर या बीज बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। इसका औसतन खर्च ₹10,000 से ₹15,000 प्रति एकड़ होता है।

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मार्च में लगाये जाने वाली फसले

मार्च में मूंग, लोबिया और भिंडी, कद्दू जैसी सब्जियों की खेती शुरू होती है। गर्मी की शुरुआत में ये फसलें अच्छी पैदावार देती हैं। प्रति एकड़ खर्च ₹7,000 से ₹12,000 तक आता है, जो सब्जियों की तेज बिक्री के चलते जल्दी रिकवर हो जाता है।

अप्रैल में लगाये जाने वाली फसले

अप्रैल में बाजरा, ज्वार और मक्का जैसी फसलें उगाई जाती हैं। ये गर्म वातावरण में कम पानी में भी उग जाती हैं और सूखा प्रभावित इलाकों के लिए आदर्श मानी जाती हैं। शुरुआती खर्च ₹6,000 से ₹10,000 प्रति एकड़ होता है।

मई में लगाये जाने वाली फसले

मई के महीने में आप गन्ना और सब्जियां उगा सकते हैं। यह समय खरीफ फसलों की प्लानिंग और रोपाई का होता है। ध्यान रहे कि गन्ने को उगाने के लिए पानी की उपलब्धता जरूरी है। गन्ने की खेती में ₹30,000 से ₹35,000 तक का खर्च आता है, लेकिन यह फसल लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न देती है।

जून-जुलाई में लगाये जाने वाली फसले

जून और जुलाई मानसून की शुरुआत के महीने होते हैं। इस दौरान धान, उड़द, सोयाबीन और कपास जैसी खरीफ फसलें बोई जाती हैं। धान की खेती में ₹12,000 से ₹18,000, सोयाबीन में ₹8,000 से ₹11,000 और कपास में ₹15,000 से ₹20,000 का खर्च आता है। ये फसलें मानसून के साथ अच्छी तरह से बढ़ती हैं।

अगस्त-सितंबर में लगाये जाने वाली फसले

अगस्त और सितंबर में तिल, मक्का (दूसरी फसल) और हरा चना बोया जाता है। ये फसलें जल्दी तैयार होती हैं और चारे के रूप में भी उपयोग होती हैं। खर्च ₹6,000 से ₹10,000 प्रति एकड़ आता है और पशुपालन के लिए भी उपयोगी होती हैं।

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अक्टूबर में लगाये जाने वाली फसले

अक्टूबर में ठंड की शुरुआत होती है और यह रबी फसलों की बुवाई का प्रमुख महीना है। गेहूं, सरसों और चने की खेती इस महीने होती है। गेहूं में ₹10,000 से ₹15,000, सरसों में ₹8,000 से ₹12,000 और चने में ₹7,000 से ₹11,000 तक का खर्च आता है।

नवंबर-दिसंबर में लगाये जाने वाली फसले

साल के आखिरी महीने नवंबर और दिसंबर में आलू, प्याज, लहसुन और मेथी जैसी सब्जियों की खेती की जाती है। इनकी डिमांड सर्दियों में बहुत रहती है और स्टोरेज लाइफ भी लंबी होती है। आलू में ₹20,000 से ₹25,000, प्याज और लहसुन में ₹15,000 से ₹20,000 तक का खर्च आता है।

मिट्टी और मौसम का तालमेल है जरूरी

फसल चुनने से पहले यह जरूर जांच लें कि आपकी मिट्टी उस फसल के लिए उपयुक्त है या नहीं। हर फसल की अपनी जरूरत होती है और हर मिट्टी हर फसल के लिए अनुकूल नहीं होती। खेती की शुरुआत से पहले मिट्टी की जांच करवाना बेहद जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: क्या हर महीने खेती शुरू की जा सकती है?
उत्तर: हां, यदि आप सही फसल का चुनाव करें और मौसम के अनुसार योजना बनाएं तो साल भर खेती मुनाफेदार हो सकती है।

प्रश्न 2: क्या इन फसलों पर सरकार की तरफ से कोई सहायता मिलती है?
उत्तर: हां, केंद्र और राज्य सरकारें बीज, खाद और सिंचाई के लिए सब्सिडी योजनाएं चलाती हैं। अपने नजदीकी कृषि केंद्र से संपर्क करें।

प्रश्न 3: मिट्टी की जांच कैसे करवाई जा सकती है?
उत्तर: आप नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या सरकारी मिट्टी परीक्षण केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। कई राज्य मुफ्त मिट्टी जांच की सुविधा भी देते हैं।

निष्कर्ष

मौसम के अनुसार फसलों का चयन करना न सिर्फ लागत को कम करता है बल्कि उत्पादन और मुनाफा भी बढ़ाता है। ऊपर दी गई जानकारी से आप पूरे साल की खेती की योजना बना सकते हैं। बस ध्यान रखें कि फसल की जरूरत, मौसम और मिट्टी – इन तीनों का तालमेल सबसे जरूरी है।

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