धान की खेती करने वाले किसान भाई पिछले कुछ सालों से एक बड़ी समस्या से परेशान हैं और वह है बीपीएच यानी ब्राउन प्लांट होपर (Brown Plant Hopper)। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह छोटा सा कीट धान की फसल को 20% से लेकर 70% तक बर्बाद कर देता है। लेकिन अब घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि किसानों को मिल गया है एक जबरदस्त हथियार – कोबी कीटनाशक।
खास बात यह है कि एक बार छिड़काव करने से यह लंबे समय तक बीपीएच को कंट्रोल करके रखता है और फसल को तबाही से बचा लेता है।
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Brown Plant Hopper (BPH) इतना खतरनाक क्यों है
किसान भाइयों, बीपीएच की सबसे बड़ी चालाकी यही है कि यह किसी भी सामान्य दवा पर जल्दी से जल्दी प्रतिरोध (Resistance) बना लेता है। यानी चाहे किसान कितनी भी बार स्प्रे कर लें, यह कीट दवा के असर से बच निकलता है। यही कारण है कि खेत में बार-बार छिड़काव के बावजूद नुकसान बढ़ता जाता है।
लेकिन अब समाधान है – कोबी (KOBI)। इसमें मौजूद Ethiprole 10.7% + Pymetrozine 40% बीपीएच को लंबे समय तक कंट्रोल में रखने की क्षमता रखते हैं।
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कोबी कैसे करता है काम धान की फसल में
किसान भाई, कोबी के अंदर दो अलग-अलग एक्टिव इंग्रेडिएंट हैं:
- इथिप्रोल (Ethiprole): यह कांटेक्ट इंसेक्टिसाइड है जो सीधे बीपीएच के नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है और उसे खत्म कर देता है।
- पाईमेट्रोजाइन (Pymetrozine): यह सिस्टेमिक इंसेक्टिसाइड है जो पौधे के पूरे सिस्टम में फैल जाता है। जब भी बीपीएच पौधे का रस चूसता है, यह उसके शरीर में पहुंचकर उसे खाना बंद करवा देता है और धीरे-धीरे उसका प्रजनन भी रोक देता है।
इसके अलावा कोबी का Translaminar Action भी है। यानी यह पत्तियों की ऊपरी सतह के साथ-साथ निचली सतह तक भी पहुंचता है। इस कारण बीपीएच चाहे जहां छिपा हो, दवा वहां तक असर दिखाती है।
कब और कितनी मात्रा में करना है इस्तेमाल
धान की फसल में कोबी का इस्तेमाल सही समय पर करना बहुत जरूरी है।
- जब धान की रोपाई के 45 से 50 दिन पूरे हों
- या जब खेत में 4 से 5 बीपीएच दिखाई दें
तभी इसका छिड़काव करना चाहिए।
सही मात्रा:
170 ग्राम प्रति एकड़ को 180 से 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना है।
किसान भाइयों, ध्यान रहे कि छिड़काव फसल के नीचे तक जरूर पहुंचे, क्योंकि बीपीएच ज्यादातर तनों के पास ही रहता है।
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— PJ Margo (@PJMARGOBIO) August 30, 2025
कोबी क्यों है किसानों के लिए सबसे बेहतर विकल्प
किसान भाइयों, मार्केट में इसी टेक्निकल का बायर कंपनी का Cruvix Pro भी आता है। लेकिन कोबी का फायदा यह है कि:
- यह ज्यादा समय तक असर दिखाता है
- कीमत में सस्ता है
- और सबसे अहम बात, यह भारतीय कंपनी का प्रोडक्ट है
जब हमारा देश खुद इतना बढ़िया और सस्ता विकल्प दे रहा है तो हमें विदेशी प्रोडक्ट पर निर्भर रहने की जरूरत ही नहीं है। यही कारण है कि आज कोबी किसानों के लिए बीपीएच से बचाव का सबसे कारगर और भरोसेमंद उपाय बन चुका है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: बीपीएच क्या है और यह कितना नुकसान करता है?
उत्तर: बीपीएच यानी ब्राउन प्लांट होपर धान की फसल का खतरनाक कीट है। यह फसल को 20% से लेकर 70% तक बर्बाद कर सकता है।
प्रश्न 2: कोबी को धान की फसल में कब डालना चाहिए?
उत्तर: धान की रोपाई के 45 से 50 दिन बाद या जब खेत में 4-5 बीपीएच दिखाई दें तब इसका इस्तेमाल करना चाहिए।
प्रश्न 3: कोबी का सही डोज कितना है?
उत्तर: प्रति एकड़ 170 ग्राम कोबी 180 से 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
प्रश्न 4: कोबी अन्य दवाओं से बेहतर क्यों है?
उत्तर: कोबी ज्यादा समय तक असर दिखाता है, बीपीएच पर तुरंत कंट्रोल करता है और Cruvix Pro जैसे विदेशी प्रोडक्ट से सस्ता भी है।
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