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किसान भाइयों, जब हम अपनी मेहनत से उगाई गई गेहूं की फसल को खेत से घर लाते हैं और उसे भंडारण के लिए टंकी में भर देते हैं, तो कुछ समय बाद उसमें कीड़े, घुन या सूंडी लगने की समस्या आ जाती है। यदि समय रहते इसका ध्यान नहीं दिया गया, तो पूरी गेहूं खराब हो जाती है। ऐसी स्थिति में न तो वह खाने के लायक रहती है और न ही उसे बाज़ार में अच्छे दाम मिलते हैं। इससे किसान का साल भर का अनाज और मेहनत दोनों बर्बाद हो जाते हैं।
इसलिए जरूरी है कि हम गेहूं को इस तरह से स्टोर करें कि वह सालों तक सुरक्षित रहे और उसमें किसी भी प्रकार का कीड़ा, घुन या फफूंदी न लग सके। इसके लिए हमें रासायनिक विकल्पों की बजाय जैविक उपायों को अपनाना चाहिए ताकि अनाज सुरक्षित रहे और हमारे स्वास्थ्य पर भी कोई बुरा प्रभाव न पड़े।

भंडारण से पहले गेहूं की सही तैयारी कैसे करें?
सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि जब गेहूं की कटाई हो जाती है और उसे थ्रेशर या मशीन से निकाला जाता है, तब वह गर्म अवस्था में होती है। अगर इस गर्म गेहूं को सीधे टंकी में भर दिया जाए, तो अंदर गर्मी बनी रहती है और यही गर्मी बाद में कीड़े और घुन को जन्म देती है।
इसलिए जरूरी है कि जब आप गेहूं को खेत से घर लेकर आएं, तो उसे कम से कम 3-4 दिनों तक धूप में अच्छे से सुखाएं। सुखाते समय यह सुनिश्चित करें कि गेहूं के दानों में कोई नमी न रह जाए। जब आपको लगे कि गेहूं पूरी तरह सूख चुकी है, तब उसे किसी हवादार और खुले कमरे में कुछ घंटों के लिए रख दें ताकि वह ठंडी हो जाए।
ठंडी होने के बाद गेहूं को अच्छे से साफ करें। यदि उसमें भूसी, कंकड़, फफूंदी या नमी रह गई तो बाद में यही तत्व कीड़ों को आकर्षित करेंगे। पूरी तरह सूखने और साफ होने के बाद ही गेहूं को टंकी में भरना चाहिए।
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जैविक तरीकों से गेहूं को सुरक्षित कैसे रखें?
गेहूं के भंडारण में हम कई प्राकृतिक चीजों का प्रयोग करके उसे लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। ये तरीके बिल्कुल जैविक हैं और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं हैं।
चूना
चूना यानी वह सफेद पाउडर जो हम घरों की रंगाई में इस्तेमाल करते हैं। यह नमी को सोखने की अद्भुत क्षमता रखता है। लगभग 10 क्विंटल गेहूं की टंकी के लिए 2 किलो चूना पर्याप्त होता है। इस चूने को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर सूती कपड़े में पोटलियां बना लें। जब आप गेहूं को टंकी में भरें, तो हर एक-दो क्विंटल पर एक पोटली रखें। चूना टंकी में आई नमी को सोख लेता है और इस कारण से गेहूं में कीड़े नहीं लगते।
नीम की सूखी पत्तियां
नीम की पत्तियों को सुखाकर भी टंकी में डाला जा सकता है। इन पत्तियों को कपड़े की पोटलियों में या सीधे भी गेहूं में रखा जा सकता है। नीम की गंध कीड़ों को आने से रोकती है और फसल को प्राकृतिक तरीके से सुरक्षित रखती है।
सिलिका जेल पाउच
जैसे नए जूते या बैग में एक छोटा-सा पाउच आता है, उसी प्रकार के सिलिका पाउच आप मार्केट से खरीद सकते हैं। इन पाउचों की विशेषता होती है कि ये वातावरण की नमी को सोख लेते हैं। 10 क्विंटल टंकी के लिए 5-6 सिलिका पाउच पर्याप्त होते हैं। टंकी भरते समय इन्हें बीच-बीच में रखें। ध्यान रखें कि गेहूं पिसवाने से पहले ये पाउच निकाल लिए जाएं।
कपूर और लौंग
100 ग्राम कपूर और 50 ग्राम लौंग को टंकी भरते समय बीच-बीच में डालें। इनकी सुगंध और रासायनिक गुण कीड़ों और घुन को आने से रोकते हैं। इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता और अनाज लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।
अगर टंकी में कीड़े लग जाएं तो क्या करें?
अगर किसी कारणवश टंकी में कीड़े या घुन लग जाएं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले टंकी को पूरी तरह खाली करें और गेहूं को अच्छी तरह से धूप में सुखाएं। जब वह पूरी तरह सूख जाए, तब पहले की तरह जैविक उपाय अपनाते हुए उसे दोबारा स्टोर करें। इस प्रक्रिया से कीड़े मर जाएंगे और गेहूं फिर से सुरक्षित हो जाएगी।
निष्कर्ष
किसान भाइयों, रसायनों से दूर रहते हुए हम जैविक और सुरक्षित तरीकों से अपने अनाज को वर्षों तक सुरक्षित रख सकते हैं। ऊपर बताए गए उपाय न केवल कारगर हैं, बल्कि हमारी और हमारे परिवार की सेहत को भी सुरक्षित रखते हैं। यदि आप इन तरीकों को सही ढंग से अपनाते हैं, तो यकीन मानिए आपकी गेहूं की टंकी में सालों तक कोई कीड़ा या घुन नहीं लगेगा और अनाज एकदम ताजा बना रहेगा।
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