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जिस समय लोग मानते हैं कि खेती में कुछ नहीं रखा, उस समय अनिल भाई ने खेती को नया रूप देकर उसे एक बिजनेस मॉडल में बदल दिया। एक समय था जब वह एक लीटर पेट्रोल के लिए भी सोचते थे, आज उनकी 10 से ज्यादा गाड़ियाँ हैं – और यह सब मुमकिन हुआ सिर्फ खेती से।
कहां से हैं अनिल भाई?
अनिल कुमार राजस्थान के भिवाड़ी (जिला अलवर) के पास स्थित एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने BA, LLB और एग्रीकल्चर से जुड़े कुछ कोर्स किए। खेती में कुछ नया करने की सोच ने उन्हें आम किसान से अलग बना दिया।
नर्सरी का व्यवसाय – शुरुआत और संघर्ष
अनिल भाई ने 2018 में ₹50,000 से एक नर्सरी की शुरुआत की। शुरुआत में परिवार और समाज ने विरोध किया – कहा, “इतने कम पैसों में क्या कर लोगे?” लेकिन अनिल भाई ने हार नहीं मानी।
उन्होंने देखा कि किसानों को जो पौधे मिलते हैं, उनमें क्वालिटी की बहुत कमी होती है – मिक्स वैरायटी, देसी बीज आदि। तभी उन्होंने तय किया कि वे उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार करेंगे।

नींबू से लेकर सेब तक – 21 फलों की खेती
आज उनके पास एक ऐसा सेटअप है जिसमें 21 से अधिक किस्मों के पौधे तैयार किए जाते हैं। जैसे:
डोरसेट गोल्डन (सेब)
ब्लैक सिस्टम (प्लम)
एनआरसी सेज (नींबू)
बादाम, अखरोट, कीवी, शान-ए-पंजाब (अनार)
नवरंग, पूसा सीडलेस, गंगाजल (अमरूद)
सिंदूर, भगवान (अनार की प्रजातियाँ)
ऑल इंडिया सप्लाई और ऑनलाइन बुकिंग
उनकी नर्सरी से आज ऑल इंडिया लेवल पर पौधों की सप्लाई होती है। किसान जुलाई से बुकिंग करते हैं और दिसंबर में पौधे कूरियर से भेजे जाते हैं।
किसानों को मिलती है मुफ्त ट्रेनिंग
अनिल भाई सिर्फ पौधे नहीं बेचते, बल्कि किसानों को ट्रेनिंग भी देते हैं – कैसे पौधा लगाना है, किस मौसम में कौन सी प्रजाति सही है, और किस पौधे में कितना मुनाफा मिल सकता है।
किसान भाई ध्यान दें – गलत पौधों से बचें
वह किसानों को चेतावनी देते हैं कि किसी भी नर्सरी से सिर्फ सस्ते के चक्कर में पौधे ना खरीदें। खासकर नींबू और अनार जैसी फसलों में गलत पौधों से भारी नुकसान हो सकता है।
नर्सरी का पता और संपर्क जानकारी
नर्सरी का पता:
गांव स्थल, नजदीकी शहर – भिवाड़ी, जिला – अलवर, राजस्थान
जयपुर से – 200 KM, गुरुग्राम से – 35 KM
आप वहां जाकर नर्सरी देख सकते हैं, पौधे खरीद सकते हैं और मुफ्त सलाह भी ले सकते हैं।
वीडियो से क्या सीखें?
खेती को भी एक सफल बिजनेस में बदला जा सकता है।
अच्छी प्लानिंग और रिसर्च से कोई भी किसान करोड़ों कमा सकता है।
समाज चाहे रोकने की कितनी भी कोशिश करे, अगर इरादा मजबूत हो तो कुछ भी मुमकिन है।
अंत में
अगर आप भी खेती में कुछ नया करना चाहते हैं, पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नवाचार करना चाहते हैं, तो यह कहानी आपके लिए एक प्रेरणा हो सकती है।
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पुरुषोत्तम बिसेन कृषि आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म sacchikheti.com के संस्थापक और कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्होंने B.Sc. एग्रीकल्चर में स्नातक किया है और वे किसानों के लिए स्वयं कृषि से जुड़ा कंटेंट लिखते हैं।
