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फरवरी-मार्च में खेती की नई योजनाएं बनाने वाले किसानों के बीच इन दिनों चंदन की खेती को लेकर चर्चा तेज है। कई किसान जानना चाहते हैं कि अगर वे 100 पेड़ लगाते हैं तो वास्तव में कितनी कमाई हो सकती है। क्या यह सपना सच में करोड़ों तक पहुंचता है या फिर इसमें जोखिम भी छिपा है? इस रिपोर्ट में हम चंदन की खेती से जुड़ी कानूनी स्थिति, उपयुक्त मिट्टी, पौध चयन, उत्पादन और संभावित आय का पूरा विश्लेषण पेश कर रहे हैं।
चंदन की खेती पूरी तरह वैध, लेकिन?
साल 2017 के बाद नियमों में बदलाव के चलते चंदन की खेती अब पूरी तरह वैध है। कोई भी किसान अपने खेत में चंदन के पौधे लगा सकता है। हालांकि चंदन के निर्यात का अधिकार केवल सरकार के पास है। किसान सीधे एक्सपोर्ट नहीं कर सकते, लेकिन वे घरेलू बाजार में चंदन की लकड़ी बेच सकते हैं।
सरकार का उद्देश्य चंदन की खेती को बढ़ावा देना और अवैध कटाई पर रोक लगाना है। इसलिए किसान को स्थानीय वन विभाग के नियमों की जानकारी रखना जरूरी है।

किस मिट्टी और मौसम में करें चंदन की खेती
चंदन की खेती के लिए बलुई दोमट और दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत में पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए। जल स्तर बहुत ऊंचा नहीं होना चाहिए, खासकर पांच फीट के भीतर पानी नहीं आना चाहिए।
पौधरोपण के लिए जुलाई से नवंबर के बीच का समय अच्छा माना जाता है। अगस्त सबसे उपयुक्त महीना है। इसके अलावा 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच भी चंदन की खेती शुरू की जा सकती है।
पौध चयन में बरतें सावधानी
चंदन की खेती की सफलता काफी हद तक सही पौध चयन पर निर्भर करती है। पौधा कम से कम डेढ़ फीट ऊंचा होना चाहिए। चंदन एक परजीवी पौधा है, इसलिए इसके साथ एक होस्ट प्लांट जैसे लाल मेहंदी लगाना जरूरी है।
पौधे का तना भूरा और स्वस्थ होना चाहिए। विश्वसनीय नर्सरी से ही पौधे खरीदें। एक पौधे की कीमत लगभग 100 से 150 रुपये तक होती है।
चंदन की खेती में उत्पादन और समय
चंदन की खेती लंबी अवधि का निवेश है। पौधा 15 से 20 वर्ष में परिपक्व होता है। इस दौरान यदि आसपास अन्य पौधे लगाए जाएं और जंगल जैसा वातावरण बनाया जाए तो वृद्धि बेहतर होती है।
एक परिपक्व पेड़ से औसतन 15 किलोग्राम हार्टवुड यानी कीमती गिरी प्राप्त हो सकती है। यही हिस्सा बाजार में सबसे ज्यादा मूल्य पर बिकता है और इसका उपयोग इत्र, कॉस्मेटिक और औषधि उद्योग में होता है।
100 पेड़ों से संभावित कमाई का गणित
बाजार में चंदन की लकड़ी की कीमत गुणवत्ता पर निर्भर करती है। दक्षिण भारत, विशेषकर कर्नाटक की लकड़ी ए-ग्रेड मानी जाती है। अन्य राज्यों की लकड़ी बी-ग्रेड में आती है।
औसत दर यदि 10,000 रुपये प्रति किलोग्राम मानी जाए तो एक पेड़ से 15 किलो के हिसाब से 1,50,000 रुपये तक की आय संभव है। यदि 100 पेड़ सफलतापूर्वक तैयार हो जाएं तो यह राशि 1 करोड़ 50 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
हालांकि यह अनुमान आदर्श परिस्थितियों पर आधारित है। वास्तविक आय लकड़ी की गुणवत्ता, सरकारी नीलामी दर और बाजार की मांग पर निर्भर करेगी।
क्या चंदन की खेती आपके लिए सही है?
चंदन की खेती धैर्य और दीर्घकालिक योजना मांगती है। यह तुरंत लाभ देने वाली फसल नहीं है। 15 से 20 साल का इंतजार करना पड़ता है।
यदि किसान भविष्य की पीढ़ी के लिए निवेश करना चाहते हैं तो चंदन की खेती एक मजबूत विकल्प हो सकता है। सही जानकारी, कानूनी प्रक्रिया और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर इससे बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।
अंततः चंदन की खेती में सफलता योजना, देखभाल और बाजार समझ पर निर्भर करती है। जल्दबाजी के बजाय ठोस रणनीति के साथ शुरुआत करना ही समझदारी होगी।

पुरुषोत्तम बिसेन कृषि आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म sacchikheti.com के संस्थापक और कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्होंने B.Sc. एग्रीकल्चर में स्नातक किया है और वे किसानों के लिए स्वयं कृषि से जुड़ा कंटेंट लिखते हैं।
