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धान की खेती करने वाले किसानों के लिए धान में खरपतवार की दवा का सही चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है। धान की रोपाई या सीधी बुवाई के बाद खेत में उगने वाले खरपतवार जैसे सांवा घास, दूब घास, मोथा, गाजर घास, हजारदाना, चौड़ी पत्ती और संकरी पत्ती वाले खरपतवार फसल की वृद्धि को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया जाए, तो उपज में 30 से 50 प्रतिशत तक गिरावट देखी जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सही समय पर सही खरपतवार नाशक का प्रयोग करने से न केवल फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।
धान में खरपतवार क्यों बनते हैं बड़ी समस्या?
धान के खेत में खरपतवार फसल के साथ पानी, पोषक तत्व, सूर्य प्रकाश और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। परिणामस्वरूप पौधों की वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन घट जाता है।
विशेष रूप से सांवा घास, मोथा और गाजर घास जैसी जिद्दी खरपतवार तेजी से फैलती हैं और बाद में इन्हें नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
धान में खरपतवार की दवा कब करें स्प्रे?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे अच्छा समय तब होता है जब खरपतवार 2 से 5 पत्ती अवस्था में हों। इस अवस्था में दवाओं का प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिलता है।
यदि खरपतवार बड़े हो जाते हैं, तो दवाओं का असर कम हो जाता है और कई बार दोबारा स्प्रे करने की आवश्यकता पड़ती है।
प्री-इमर्जेंट खरपतवार नाशक क्या है?
प्री-इमर्जेंट दवाएं वे होती हैं जिनका उपयोग रोपाई के तुरंत बाद किया जाता है, ताकि खरपतवार उगने ही न पाएं।
1. कोरियन (Corteva Korean)
यह धान के लिए सबसे प्रभावी प्री-इमर्जेंट खरपतवार नाशकों में गिनी जाती है। इसमें ब्यूटाक्लोर और फिनोक्सासुलम जैसे आधुनिक तकनीकी तत्व मौजूद होते हैं।
इसका प्रयोग रोपाई के 3 से 7 दिन के भीतर किया जा सकता है। इसका डोज लगभग 800 मिली प्रति एकड़ माना जाता है।
यह खेत में एक सुरक्षा परत बनाकर खरपतवार के अंकुरण को रोकने में मदद करती है।
2. सिकोसा (Crystal Sicosa)
यह भी एक उन्नत तकनीक वाली दवा है, जिसमें प्रेटिलाक्लोर और बेंसल्फ्यूरॉन जैसे तत्व मौजूद रहते हैं।
इसका उपयोग रोपाई के पांच दिन के भीतर किया जा सकता है और यह चौड़ी व संकरी दोनों प्रकार की घासों पर अच्छा नियंत्रण प्रदान करती है।
3. रिफिट प्लस
धान उत्पादक किसानों के बीच यह भी एक लोकप्रिय विकल्प बन चुकी है। इसका उपयोग रोपाई के शुरुआती तीन दिनों में करने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं।
पोस्ट-इमर्जेंट खरपतवार नाशक
जब खरपतवार निकल चुके हों, तब पोस्ट-इमर्जेंट दवाओं का प्रयोग किया जाता है।
धान में खरपतवार की दवा के लिए सबसे प्रभावी कॉम्बिनेशन
नोबलेक्ट (Noblect)
पिछले कुछ वर्षों में यह दवा किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हुई है। यह विभिन्न प्रकार की चौड़ी और संकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण प्रदान करती है।
इसका डोज लगभग 400 से 500 मिली प्रति एकड़ माना जाता है।
यह सीधी बिजाई और रोपाई दोनों परिस्थितियों में अच्छे परिणाम देती है।
नॉमिनी गोल्ड + ऑलमिक्स
यह कॉम्बिनेशन भी धान के खेतों में अत्यधिक उपयोग किया जाता है। नॉमिनी गोल्ड खरपतवारों की शुरुआती अवस्था में काफी प्रभावी साबित होती है।
इसके साथ ऑलमिक्स मिलाने से चौड़ी पत्ती और संकरी पत्ती दोनों प्रकार की घासों पर नियंत्रण बेहतर हो जाता है।
पीआई की नई तकनीक आधारित दवा
कई आधुनिक कंपनियों ने अब तीन तकनीकी तत्वों वाली दवाएं बाजार में उतारी हैं, जो एक साथ कई प्रकार के खरपतवारों को नियंत्रित करने में सक्षम हैं।
इनका उपयोग विशेष रूप से उन क्षेत्रों में किया जा रहा है जहां सांवा घास और मोथा की समस्या अधिक है।
मोथा घास के लिए विशेष उपाय
धान के खेत में यदि मोथा घास अधिक मात्रा में दिखाई दे रही है, तो इसके लिए विशेष सल्फ्यूरॉन आधारित दवाओं का प्रयोग लाभकारी माना जाता है।
इन दवाओं का उपयोग केवल अनुशंसित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।
खरपतवार नाशक का स्प्रे करते समय रखें ये सावधानियां
धान के खेत में कम से कम 2 इंच पानी होना चाहिए।
स्प्रे के समय खेत में पर्याप्त नमी बनी रहनी चाहिए।
दवा की मात्रा कभी भी अनुशंसित डोज से अधिक नहीं लेनी चाहिए।
खरपतवार 5 पत्ती अवस्था से अधिक बड़े नहीं होने चाहिए।
सुबह या शाम के समय स्प्रे करना अधिक प्रभावी माना जाता है।
धान में खरपतवार नियंत्रण से कितना बढ़ सकता है उत्पादन?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि धान की फसल में शुरुआती 40 दिनों तक खरपतवार नियंत्रण सही तरीके से किया जाए, तो उत्पादन में 20 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि देखी जा सकती है।
समय पर खरपतवार नियंत्रण करने से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और दानों की संख्या भी अधिक बनती है।
निष्कर्ष
धान की खेती में खरपतवार सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। यदि किसान सही समय पर सही दवा का चयन करते हैं, तो सांवा घास, मोथा, गाजर घास और अन्य जिद्दी खरपतवारों पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है।
प्री-इमर्जेंट और पोस्ट-इमर्जेंट दोनों प्रकार की दवाओं का संतुलित उपयोग धान की फसल को सुरक्षित रखने और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
FAQ
Q1. धान में खरपतवार की दवा कब डालनी चाहिए?
धान में खरपतवार नाशक का छिड़काव खरपतवार की 2 से 5 पत्ती अवस्था में करना सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है।
Q2. धान में सांवा घास की रोकथाम कैसे करें?
सांवा घास की रोकथाम के लिए आधुनिक पोस्ट-इमर्जेंट दवाओं का उपयोग किया जा सकता है। शुरुआती अवस्था में स्प्रे करने पर बेहतर परिणाम मिलते हैं।
Q3. धान में मोथा घास के लिए कौन सी दवा अच्छी है?
मोथा घास नियंत्रण के लिए सल्फ्यूरॉन आधारित खरपतवार नाशकों का उपयोग प्रभावी माना जाता है।
Q4. क्या सीधी बिजाई वाले धान में भी यही दवाएं काम करती हैं?
हाँ, कई आधुनिक खरपतवार नाशक सीधी बिजाई और रोपाई दोनों परिस्थितियों में प्रभावी पाए गए हैं।
Q5. क्या अधिक मात्रा में दवा डालने से बेहतर परिणाम मिलते हैं?
नहीं। अधिक मात्रा में दवा प्रयोग करने से फसल को झटका लग सकता है और नुकसान भी हो सकता है। हमेशा अनुशंसित मात्रा का ही उपयोग करें।

पुरुषोत्तम बिसेन कृषि आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म sacchikheti.com के संस्थापक और कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्होंने B.Sc. एग्रीकल्चर में स्नातक किया है और वे किसानों के लिए स्वयं कृषि से जुड़ा कंटेंट लिखते हैं।
