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धान की खेती में अच्छी पैदावार के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि पौधों में अधिक से अधिक कल्ले निकलें। कई किसान धान की रोपाई तो सही समय पर कर देते हैं, लेकिन बाद में फसल प्रबंधन में छोटी-छोटी गलतियों के कारण पौधों में पर्याप्त फुटाव नहीं हो पाता। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि धान में ज्यादा कल्ले कैसे बढ़ाएं ताकि उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, रोपाई के बाद 20 से 40 दिन का समय धान की फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी अवधि में पौधों में अधिकतम कल्ले निकलते हैं और यही भविष्य की पैदावार तय करते हैं।
धान में कल्ले क्यों नहीं निकलते?
धान में कम फुटाव होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें देर से रोपाई करना, खेत में लगातार अधिक पानी भरा रहना, पोषक तत्वों की कमी और खरपतवार नियंत्रण में लापरवाही प्रमुख कारण हैं।
यदि पौधों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो पौधे कमजोर हो जाते हैं और कल्ले निकलने की क्षमता कम हो जाती है।
सही उम्र की पौध का चयन करें
कई किसान 35 से 40 दिन पुरानी नर्सरी की रोपाई कर देते हैं, जिससे बाद में फुटाव कम देखने को मिलता है।
विशेषज्ञों के अनुसार धान की पौध को 25 से 30 दिन की अवस्था में ही मुख्य खेत में लगाना चाहिए। कम उम्र की पौध तेजी से जड़ें विकसित करती है और बाद में अधिक कल्ले देती है।
धान में ज्यादा कल्ले कैसे बढ़ाएं? अपनाएं सही खाद प्रबंधन
धान की फसल में खाद प्रबंधन तीन चरणों में किया जाता है और प्रत्येक चरण का अपना अलग महत्व होता है।
पहली खाद: रोपाई के समय
रोपाई के समय पौधों को सबसे अधिक आवश्यकता फास्फोरस की होती है क्योंकि यह जड़ों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस समय प्रति एकड़ लगभग 50 किलोग्राम डीएपी का उपयोग करना लाभकारी माना जाता है। डीएपी में फास्फोरस के साथ नाइट्रोजन भी मौजूद होता है, जो शुरुआती वृद्धि में मदद करता है।
यदि संभव हो तो थोड़ी मात्रा में पोटाश का भी प्रयोग किया जा सकता है।
खेत में अधिक पानी न भरें
धान की खेती में एक बड़ी गलती यह होती है कि किसान रोपाई के तुरंत बाद खेत में लगातार 3 से 4 इंच पानी भरकर रखते हैं।
लगातार पानी भरा रहने से जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और कल्ले कम निकलते हैं।
रोपाई के बाद खेत को हल्की नमी की स्थिति में रखना सबसे बेहतर माना जाता है।
दूसरी खाद: 20 से 22 दिन बाद
यह समय धान की फसल की वेजिटेटिव या टिलरिंग स्टेज कहलाता है।
इस समय पौधों को सबसे ज्यादा नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। इसलिए प्रति एकड़ 40 से 45 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग करना लाभकारी माना जाता है।
यूरिया पौधों में क्लोरोफिल निर्माण को बढ़ाता है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं और अधिक कल्ले निकलते हैं।
जिंक का प्रयोग जरूर करें
धान की फसल में जिंक को अमृत समान माना जाता है।
20 से 22 दिन की अवस्था में प्रति एकड़ 6 से 8 किलोग्राम जिंक सल्फेट (33 प्रतिशत) का प्रयोग करने से पौधों की वृद्धि तेजी से होती है।
जिंक की कमी होने पर पौधे पीले पड़ने लगते हैं और फुटाव कम हो जाता है।
कीट नियंत्रण भी है जरूरी
टिलरिंग स्टेज पर तना छेदक और पत्ता लपेट सुंडी का प्रकोप तेजी से बढ़ता है।
यदि इन कीटों का समय पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो पौधों में फुटाव कम हो सकता है।
इसलिए यूरिया के साथ अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करना लाभकारी माना जाता है।
तीसरी खाद: 35 से 40 दिन बाद
40 दिन के बाद नई टिलरिंग लगभग बंद हो जाती है।
इस समय पौधों को पोटाश की आवश्यकता होती है। पोटाश पौधों को मजबूत बनाने, दानों के भराव और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।
प्रति एकड़ लगभग 25 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश का उपयोग किया जा सकता है।
खरपतवार नियंत्रण क्यों जरूरी है?
यदि खेत में खरपतवार अधिक मात्रा में मौजूद हैं, तो वे पौधों से पोषक तत्व और पानी छीन लेते हैं।
ऐसी स्थिति में चाहे किसान कितना भी खाद डाल दे, पौधों में पर्याप्त कल्ले नहीं निकलेंगे।
इसलिए शुरुआती 30 दिनों के भीतर खरपतवार नियंत्रण करना बेहद जरूरी माना जाता है।
ज्यादा कल्ले पाने के लिए ध्यान रखें ये बातें
समय पर रोपाई करें।
25-30 दिन की पौध ही लगाएं।
खेत में लगातार पानी न भरें।
संतुलित मात्रा में डीएपी, यूरिया, जिंक और पोटाश का प्रयोग करें।
खरपतवार और कीटों पर समय रहते नियंत्रण करें।
धान में ज्यादा कल्ले आने से क्या फायदा होगा?
ज्यादा कल्ले निकलने का सीधा संबंध उत्पादन से होता है।
प्रत्येक स्वस्थ कल्ले पर बालियां निकलती हैं, जिससे दानों की संख्या बढ़ती है और प्रति एकड़ उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
सही प्रबंधन अपनाने पर किसान उत्पादन में 20 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि प्राप्त कर सकते हैं।
निष्कर्ष
यदि किसान सही समय पर पौध रोपाई करें, खेत में उचित जल प्रबंधन अपनाएं और संतुलित मात्रा में खाद एवं जिंक का प्रयोग करें, तो धान की फसल में भरपूर फुटाव देखा जा सकता है।
जो किसान यह जानना चाहते हैं कि धान में ज्यादा कल्ले कैसे बढ़ाएं, उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 20 से 40 दिन की अवस्था में फसल की विशेष देखभाल की जाए। यही समय भविष्य की पैदावार तय करता है।
FAQ
Q1. धान में ज्यादा कल्ले निकलने का सही समय कौन सा होता है?
धान में रोपाई के 20 से 40 दिन के बीच सबसे अधिक कल्ले निकलते हैं।
Q2. धान में कल्ले बढ़ाने के लिए कौन सी खाद सबसे जरूरी है?
यूरिया और जिंक का संतुलित उपयोग कल्ले बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Q3. क्या लगातार पानी भरा रहने से कल्ले कम निकलते हैं?
हाँ, अधिक पानी रहने से जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिलती और फुटाव कम हो जाता है।
Q4. धान में जिंक कब डालना चाहिए?
रोपाई के लगभग 20 से 22 दिन बाद जिंक का प्रयोग करना लाभकारी माना जाता है।
Q5. क्या खरपतवार उत्पादन को प्रभावित करते हैं?
हाँ, खरपतवार पौधों से पोषक तत्व छीन लेते हैं, जिससे कल्ले और उत्पादन दोनों कम हो जाते हैं।

पुरुषोत्तम बिसेन कृषि आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म sacchikheti.com के संस्थापक और कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्होंने B.Sc. एग्रीकल्चर में स्नातक किया है और वे किसानों के लिए स्वयं कृषि से जुड़ा कंटेंट लिखते हैं।
