धान में पहली खाद का सही तरीका: जिंक और ये 5 चीजें डालते ही कल्ले बढ़ेंगे, फसल बनेगी हरी-भरी

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खरीफ सीजन में धान में पहली खाद का सही प्रबंधन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। कई किसान समय पर रोपाई तो कर देते हैं, लेकिन शुरुआती दिनों में सही पोषक तत्व नहीं देने के कारण धान में कल्ले कम निकलते हैं, पौधों में पीलापन आ जाता है और अंत में उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि रोपाई के 7 से 10 दिनों के भीतर सही खाद का प्रयोग किया जाए, तो धान की वृद्धि तेज होती है और प्रति पौधा अधिक कल्ले विकसित होते हैं।

धान में पहली खाद क्यों है जरूरी?

धान की रोपाई के बाद शुरुआती 20 से 30 दिन पौधे के विकास का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसी दौरान पौधे की जड़ों का विस्तार होता है और नई टहनियां यानी कल्ले निकलना शुरू होते हैं।

अगर इस समय पौधे को पर्याप्त नाइट्रोजन, जिंक और पोटाश नहीं मिलता, तो धान की वृद्धि रुक सकती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ धान में पहली खाद को उत्पादन बढ़ाने की नींव मानते हैं।

यूरिया से मिलता है तेजी से विकास

धान की शुरुआती बढ़वार के लिए नाइट्रोजन सबसे जरूरी तत्व माना जाता है। नाइट्रोजन की पूर्ति मुख्य रूप से यूरिया के माध्यम से की जाती है।

कृषि जानकारों के अनुसार प्रति एकड़ लगभग 50 से 60 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि जिन खेतों में पहले से जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन पर्याप्त मात्रा में मौजूद हो, वहां इसकी मात्रा 40 से 50 किलोग्राम तक रखी जा सकती है।

यूरिया का सही प्रयोग पौधों को गहरा हरा रंग देने के साथ-साथ अधिक कल्ले निकालने में मदद करता है।

जिंक की कमी से पीला पड़ जाता है धान

धान की खेती में जिंक की भूमिका किसी अमृत से कम नहीं मानी जाती। कई क्षेत्रों में जिंक की कमी के कारण पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और उनकी वृद्धि रुक जाती है।

धान में पहली खाद के साथ जिंक का महत्व

विशेषज्ञों का कहना है कि धान में पहली खाद डालते समय जिंक सल्फेट का उपयोग करने से पौधों की वृद्धि काफी बेहतर होती है।

प्रति एकड़ 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट का प्रयोग पर्याप्त माना जाता है। इससे पौधों में पीलापन कम होता है, पत्तियां चौड़ी बनती हैं और कल्लों की संख्या बढ़ जाती है।

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पोटाश से मजबूत बनते हैं पौधे

पोटाश धान के पौधों के तनों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह दानों के भराव और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है।

कृषि विशेषज्ञ प्रति एकड़ 20 से 25 किलोग्राम पोटाश के प्रयोग की सलाह देते हैं। इससे पौधों के गिरने की समस्या कम होती है और दानों की गुणवत्ता बेहतर होती है।

जैविक खाद से बढ़ सकता है उत्पादन

हाल के वर्षों में कई किसान जैविक और समुद्री शैवाल आधारित खादों का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे उत्पाद पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने और कल्ले बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।

समुद्री शैवाल आधारित खादों के प्रयोग से पौधों की पत्तियां गहरी हरी रहती हैं और फसल का समग्र विकास बेहतर होता है। इससे धान के खेत अधिक स्वस्थ और आकर्षक दिखाई देते हैं।

ह्यूमिक एसिड क्यों है फायदेमंद?

ह्यूमिक एसिड जड़ों के विकास को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण तत्व माना जाता है। यह मिट्टी से पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है।

प्रति एकड़ 250 से 300 ग्राम ह्यूमिक एसिड का उपयोग करने से जड़ों का तेजी से विकास होता है और पौधे मिट्टी से अधिक पोषण ग्रहण कर पाते हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव सीधे उत्पादन पर दिखाई देता है।

पहली खाद डालते समय इन बातों का रखें ध्यान

धान की रोपाई के बाद खेत में लगातार अधिक पानी भरा रहने से जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इससे कल्ले निकलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोपाई के बाद खेत में हल्की नमी बनाए रखें और पानी का उचित प्रबंधन करें। इससे जड़ों का विकास बेहतर होगा और पौधे तेजी से बढ़ेंगे।

कब डालें पहली खाद?

धान की रोपाई के लगभग 7 से 10 दिन बाद पहली खाद देना सबसे उपयुक्त माना जाता है।

इस समय पौधे नई परिस्थितियों में खुद को स्थापित कर चुके होते हैं और उन्हें अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। सही समय पर खाद देने से कल्ले अधिक निकलते हैं और फसल का विकास संतुलित रहता है।

उत्पादन बढ़ाने का आसान फॉर्मूला

अगर किसान सही समय पर यूरिया, जिंक, पोटाश और जैविक पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग करें, तो धान की फसल में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती पोषण प्रबंधन ही भविष्य की पैदावार तय करता है। इसलिए पहली खाद को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

FAQ

प्रश्न 1: धान में पहली खाद कब डालनी चाहिए?

उत्तर: रोपाई के 7 से 10 दिन बाद पहली खाद डालना सबसे उपयुक्त माना जाता है।

प्रश्न 2: धान में जिंक की कितनी मात्रा देनी चाहिए?

उत्तर: प्रति एकड़ लगभग 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट का उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 3: धान में ज्यादा कल्ले निकालने के लिए क्या करें?

उत्तर: संतुलित मात्रा में यूरिया, जिंक और उचित जल प्रबंधन से कल्ले बढ़ाए जा सकते हैं।

प्रश्न 4: पोटाश का धान में क्या फायदा है?

उत्तर: पोटाश पौधों को मजबूत बनाता है, दानों के भराव में मदद करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

प्रश्न 5: क्या ह्यूमिक एसिड धान में फायदेमंद है?

उत्तर: हां, ह्यूमिक एसिड जड़ों के विकास और पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है।

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