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कई बार किसान भाइयों को यह समस्या देखने को मिलती है कि पौधे में हरापन नहीं आता, फूल तो लगते हैं लेकिन फल नहीं बनते, या फिर फल बनने के बाद उसका आकार नहीं बढ़ता। इससे उत्पादन पर गहरा असर पड़ता है और किसानों की मेहनत बेकार चली जाती है। अगर आप भी इस तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आज हम एक ऐसे चमत्कारी उत्पाद के बारे में बताएंगे जो इन सभी समस्याओं का तुरंत समाधान कर सकता है।

जिप ग्रो: टाइटन एग्रीटेक का भरोसेमंद उत्पाद

जिप ग्रो एक उत्कृष्ट उत्पाद है जिसे टाइटन एग्रीटेक कंपनी ने तैयार किया है। यह उत्पाद CIBRC (Central Insecticide Board & Registration Committee) द्वारा मान्यता प्राप्त है। इसके अंदर मुख्य घटक जिबरेलिक एसिड 0.001% होता है, जो लिक्विड फॉर्म में मौजूद रहता है।

 कम फल, कमजोर पौधा और फसल की धीमी ग्रोथ? जानिए जिप ग्रो के चमत्कारी फायदे और सही इस्तेमाल का तरीका

जिबरेलिक एसिड क्या है और यह कैसे काम करता है?

जिबरेलिक एसिड एक प्राकृतिक प्लांट हार्मोन होता है, जिसे GA3 या Gibberellic Acid A3 भी कहा जाता है। यह पौधों के विकास, ऊंचाई, फूल और फल की वृद्धि में विशेष भूमिका निभाता है। यह हार्मोन पौधों की कोशिकाओं के विभाजन और वृद्धि को तेज करता है, जिससे पौधों में हरापन, मजबूती और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।

जिप ग्रो के प्रमुख फायदे

जैसे ही आप ज़िप ग्रो को फसल में स्प्रे करते हैं, यह पौधों में तेजी से अवशोषित हो जाता है और कुछ ही दिनों में असर दिखाना शुरू कर देता है।
यह बीजों की डॉर्मेंसी को तोड़कर बेहतर अंकुरण में मदद करता है।
यह पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्रिया (Photosynthesis) को सक्रिय करता है, जिससे पौधों में अधिक मात्रा में भोजन बनता है और फसल स्वस्थ एवं हरी-भरी रहती है।

जिप ग्रो इंटरनोड्स (गांठों के बीच की दूरी) को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे पौधे लंबाई में अच्छे से बढ़ते हैं।
यह फूल और फल की मात्रा बढ़ाता है और उनका आकार भी बड़ा करता है।

बेल वाली फसलें जैसे लौकी, करेला, खीरा आदि में इसका इस्तेमाल बेल की लंबाई और फल की संख्या दोनों को बढ़ाता है।
जिप ग्रो फूल-फल के झड़ने की समस्या को रोकता है और पौधों को अकालिक तनाव (Heat/Cold Stress) से भी बचाता है, जिससे फसल में रोगों का असर कम होता है।

किन फसलों में और कब करें जिप ग्रो का उपयोग?

धान की फसल में इसे ट्रेलिंग स्टेज पर 250 ml प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें।

कपास की फसल में रोपाई के 40-45 दिन बाद पहला स्प्रे करें और जब कली (बल) लग जाए तब दूसरा स्प्रे करें। मात्रा 300 से 500 ml प्रति एकड़ रखें।

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सब्जियों की फसलों जैसे मिर्च, टमाटर, बैंगन में रोपाई के 25-30 दिन बाद 200 से 350 ml प्रति एकड़ की दर से उपयोग करें।

मूंगफली की फसल में रोपाई के 30-35 दिन बाद 200 से 350 ml प्रति एकड़ की मात्रा में जिप ग्रो का छिड़काव करें।

जिप ग्रो से बढ़ाएं फसल की उत्पादकता

किसान भाइयों, अगर आप फसल की बढ़वार, हरापन, फूल-फल की संख्या और गुणवत्ता बढ़ाना चाहते हैं, तो टाइटन एग्रीटेक का ज़िप ग्रो एक बेहतरीन समाधान है। इसके प्रयोग से फसल न केवल मजबूत होती है बल्कि बाजार में बेहतर दाम दिलाने में भी मदद मिलती है।

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