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अगर आप सोयाबीन की खेती करने की योजना बना रहे हैं तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मानसून कब आएगा और बारिश की मात्रा कितनी होगी। कई बार बारिश देर से शुरू होती है या फिर एक साथ बहुत अधिक हो जाती है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि खेत में बुवाई लायक नमी मौजूद है या नहीं। खेत की नमी जांचने के लिए आप मॉइस्चर चेकर का उपयोग कर सकते हैं, या फिर खुद मिट्टी को 6 से 7 इंच गहराई तक देखकर यह अनुमान लगा सकते हैं कि मिट्टी में पर्याप्त नमी है या नहीं।

सबसोइलर का उपयोग और नमी प्रबंधन

बीते सालों में देखने में आया है कि बारिश की अनियमितता के कारण फसल की वृद्धि पर असर पड़ा है। इस समस्या के समाधान के लिए सबसोइलर मशीन का उपयोग एक प्रभावी तरीका हो सकता है। यह खेत में गहरी नालियां बनाता है जिससे वर्षा का जल जमीन में गहराई तक चला जाता है और वहां संग्रहित हो जाता है। इससे सूखे जैसी स्थिति में भी पौधे की जड़ों को नमी मिलती रहती है, जिससे उनकी ग्रोथ बेहतर होती है। साथ ही, इससे मिट्टी की संरचना और उर्वरकता भी सुधरती है।

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कम लागत में अधिक उत्पादन के लिए अपनाएं सोयाबीन की खेती के ये स्मार्ट तरीके

बीज का अंकुरण परीक्षण क्यों है जरूरी

सोयाबीन की बुवाई से पहले बीज का अंकुरण परीक्षण अवश्य करना चाहिए। इसके लिए आप 100 बीज गिनकर उन्हें हल्के गीले कपड़े या अखबार में लपेटकर ठंडी और अंधेरी जगह में 48 से 72 घंटे के लिए रख दें। यदि 70% से अधिक बीज अंकुरित होते हैं, तो बीज प्रयोग योग्य है। यदि 50% से कम बीज अंकुरित होते हैं तो ऐसे बीज का उपयोग न करें, क्योंकि इससे उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

उपयुक्त वैरायटी और दूरी का चयन

सोयाबीन की दो प्रमुख वैरायटियां होती हैं – सीधी बढ़ने वाली और फैलने वाली। सीधी बढ़ने वाली वैरायटियों जैसे JS 9560 या NRC 150 के लिए कतार से कतार की दूरी लगभग 12 इंच रखी जानी चाहिए और प्रति एकड़ लगभग 30 किलो बीज की आवश्यकता होती है। वहीं फैलने वाली वैरायटियों के लिए दूरी 18 इंच तक रखी जानी चाहिए और इनमें 25 किलो बीज पर्याप्त होता है।

खाद और पोषक तत्वों का संतुलित प्रबंधन

फसल को पोषण देने के लिए यूरिया, डीएपी और पोटाश के साथ-साथ इस बार सल्फर युक्त खाद का उपयोग भी बेहद जरूरी है। सल्फर 90% को प्रति एकड़ 3 से 6 किलो तक डालना चाहिए। साथ ही, सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) खाद का भी प्रयोग करें जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि होगी।

निष्कर्ष

किसान मित्रों, यदि आप उपरोक्त सभी सुझावों को ध्यान में रखते हैं और योजनाबद्ध तरीके से सोयाबीन की खेती करते हैं, तो न केवल आपको अधिक उत्पादन मिलेगा बल्कि लागत भी कम होगी। खेती को स्मार्ट बनाएं और हर कदम पर सतर्कता बरतें ताकि आपकी मेहनत का फल भरपूर मिल सके।

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