फरवरी में चकुंदर की खेती: 60–70 दिनों में तैयार फसल, खाली खेत से शानदार मुनाफे का मौका

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फरवरी में चकुंदर की खेती: फरवरी का महीना कई किसानों को ऐसा लगता है कि नई फसल लगाने का समय निकल चुका है, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। फरवरी चकुंदर की खेती के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आता है। सही जानकारी, सही तकनीक और अनुशासित मेहनत के साथ फरवरी में बोई गई चकुंदर की फसल न सिर्फ तेजी से तैयार होती है, बल्कि बाजार में लगातार बनी मांग के कारण बढ़िया मुनाफा भी देती है। जब बढ़ती लागत किसानों को परेशान कर रही हो, तब चकुंदर जैसी कम समय में तैयार होने वाली फसल उम्मीद की नई किरण बन सकती है।

फरवरी क्यों है चकुंदर के लिए सही समय

फरवरी में मौसम न ज्यादा ठंडा होता है और न ही बहुत गर्म, जो चकुंदर के लिए आदर्श माना जाता है। हल्की ठंड और सामान्य तापमान में बीज तेजी से अंकुरित होते हैं और जड़ का विकास बेहतर होता है। जिन किसानों को लगता है कि देर हो चुकी है, उन्हें समझना चाहिए कि सही समय पर किया गया प्रयास कभी देर नहीं होता फरवरी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

फरवरी में चकुंदर की खेती 60–70 दिनों में तैयार फसल, खाली खेत से शानदार मुनाफे का मौका

खेत की तैयारी और जल निकास

चकुंदर की जड़ जमीन के भीतर विकसित होती है, इसलिए खेत की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण है। फरवरी में खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए और जड़ को फैलने में बाधा न आए। खेत में पानी रुकने की समस्या नहीं होनी चाहिए, क्योंकि जलभराव से जड़ सड़ने का खतरा बढ़ जाता है और उत्पादन प्रभावित होता है।

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बीज चयन और बोवाई की दूरी

अच्छे परिणाम के लिए उन्नत या हाइब्रिड किस्मों का बीज चुनें, जो 55 से 70 दिनों में तैयार हो जाती हैं। बोने से पहले बीज को 10–12 घंटे हल्के गुनगुने पानी में भिगो देने से अंकुरण तेज होता है। कतार से कतार 30–45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10–15 सेंटीमीटर रखें, ताकि पौधों को पर्याप्त जगह मिले और जड़ मोटी, गोल व बाजार योग्य बने।

फरवरी में चकुंदर की खेती 60–70 दिनों में तैयार फसल, खाली खेत से शानदार मुनाफे का मौका

सिंचाई प्रबंधन से बढ़ेगी उपज

बीज बोने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें। इसके बाद 7–10 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई पर्याप्त रहती है। अधिक पानी देने से बचें, क्योंकि ज्यादा नमी रोगों को बढ़ावा देती है। ड्रिप सिंचाई अपनाने से पानी की बचत के साथ उत्पादन में भी सुधार देखा गया है।

खाद और उर्वरक का संतुलन

खेत की तैयारी के समय 15–20 टन प्रति हेक्टेयर अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाना लाभकारी रहता है। इसके साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग चकुंदर के आकार और वजन को बढ़ाता है। जैविक खाद और वर्मी कंपोस्ट से मिट्टी की सेहत सुधरती है और फसल दीर्घकाल तक फायदा देती है।

खरपतवार, कीट और रोग प्रबंधन

शुरुआती 20–25 दिन खरपतवार से सबसे अधिक नुकसान होता है, इसलिए इस अवधि में निराई-गुड़ाई जरूरी है। समय-समय पर फसल का निरीक्षण करते रहें। पत्ती खाने वाले कीट और फंगल रोग दिखें तो नीम आधारित जैविक कीटनाशक का छिड़काव कारगर रहता है। रासायनिक दवाओं का सीमित और सही मात्रा में उपयोग करें, ताकि फसल सुरक्षित रहे और बाजार में भरोसेमंद बने।

कटाई का सही समय और गुणवत्ता

फरवरी में बोई गई चकुंदर की खेती आमतौर पर 60–70 दिनों में तैयार हो जाती है। जब जड़ का आकार अच्छा हो जाए और रंग गहरा लाल दिखे, तब खुदाई करें। देर से खुदाई करने पर जड़ सख्त हो सकती है और स्वाद प्रभावित होता है।

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उत्पादन, भाव और मुनाफे का गणित

सही तकनीक अपनाने पर प्रति एकड़ 100–150 क्विंटल उत्पादन आसानी से लिया जा सकता है। बाजार में चकुंदर का भाव सामान्यतः ₹10 से ₹20 प्रति किलो रहता है, जो मांग और गुणवत्ता के अनुसार बदलता है। औसतन 120 क्विंटल उत्पादन और ₹12 प्रति किलो भाव मानें, तो कुल बिक्री लगभग ₹1,44,000 होती है। जबकि प्रति एकड़ लागत करीब ₹20,000–₹25,000 रहती है। खर्च निकालने के बाद भी अच्छा मुनाफा बचता है, यही वजह है कि चकुंदर किसानों की आमदनी का मजबूत जरिया बन रही है।

आत्मविश्वास और भविष्य की खेती

चकुंदर की खेती सिर्फ पैसों की बात नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की खेती है। कम समय में मेहनत का फल मिलते देख किसान का हौसला बढ़ता है। फरवरी में खाली पड़े खेत का सही उपयोग करके किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकता है। आज सफल वही किसान है जो परंपरागत सोच से आगे बढ़कर नई फसलों और तकनीकों को अपनाता है। सही जानकारी के साथ लिया गया फैसला डर को खत्म करता है और सफलता की राह खोलता है।

फरवरी का यह समय उन किसानों के लिए है जो बदलाव चाहते हैं। चकुंदर की खेती करके किसान सिर्फ एक फसल नहीं उगाता, बल्कि अपने परिवार के भविष्य के लिए उम्मीद बोता है। समय की कीमत समझिए, सही फैसला लीजिए और इस फरवरी अपने खेत को मुनाफे का जरिया बनाइए।

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