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Laxmi Dada G Hybrid Makka: लक्ष्मी दादा G रबी सीजन के लिए उपयुक्त हाइब्रिड मक्का है। “उपज उम्मीद से ज्यादा”, उपज इतनी कि खुद किसान भी चौंक जाएं, लक्ष्मी 8414 दादा G बनेगा रबी सीजन का बादशाह

मक्का की मांग देश में तेज़ी से बढ़ रही है — विशेष कर ईंधन मिश्रण (एथनॉल), पशु-चारा और पोल्ट्री उद्योगों की वजह से। हालांकि उत्पादन में वृद्धि हो रही है, लेकिन मांग की गति उससे भी तेज़ है, जिससे कुछ श्रेणियों में आपूर्ति-दबाव महसूस हो रहा है। डिमांड सप्लाई गैप को देखते हुए मक्का फसल का मूल्य मार्केट में लगभग स्धीर बने हुए है

भारत एक कृषि प्रधान देश है — जहाँ की मिट्टी, जलवायु और मेहनतकश किसान मिलकर कृषि को नई ऊँचाइयों पर ले जाते हैं। किसानों के भरोसे को और भी मजबूत करने के लिए पेश है हमारा प्रीमियम हाइब्रिड।
“लक्ष्मी दादा G – हाइब्रिड मक्का”

भारत सरकार का E20 मिशन 2025 तक पेट्रोल में 20% एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इसके लिए लगभग 1016 करोड़ लीटर एथनॉल की आवश्यकता होगी, जिसमें अनाज आधारित स्रोतों — विशेष रूप से मक्का — की अहम भूमिका होगी। यह कदम न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि किसानों के लिए मक्का की बढ़ती मांग और बेहतर आमदनी का भी बड़ा अवसर लेकर आएगा।

तीन दशकों से अधिक अनुभव और नवाचार के साथ, यह कंपनी किसानों को दे रही है “नई सोच, नई खोज और नया बीज” — जो खेती को बना रही है अधिक उत्पादक और अधिक लाभदायक।

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Laxmi Dada G Hybrid Makka: उपज इतनी कि खुद किसान भी चौंक जाएं, लक्ष्मी 8414 दादा G बनेगा रबी सीजन का बादशाह

Laxmi Dada G Hybrid Makka

लक्ष्मी दादा नाम ही काफ़ी है – पर किसानो का विश्वास हर साल बढ़ता जा रहा है!

एक ऐसा हाइब्रिड मक्का, जो हर बार उम्मीदों से बढ़कर परिणाम देता है।
अक्टूबर से फरवरी तक की बिजाई के लिए परफेक्ट, और हर मौसम में बेहतरीन प्रदर्शन – यही है इसकी खासियत।

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  1. स्टॉक रॉट, झुलसा रोग और फॉल आर्मी वॉर्म जैसे बड़े रोगों में जबरदस्त सहनशीलता।
  2. लंबा और मजबूत पौधा,
  3. मोटा और भरा हुआ भुट्टा,
  4. और हर एकड़ में शानदार पैदावार – यही है असली “दादा”की पहचान।

“नई सोच, नई खोज और नया बीज” की इस भावना से तैयार किया गया लक्ष्मी दादा G, किसानों को देता है ‘जीत की उड़ान’
सही दूरी, सही समय और उचित खाद प्रबंधन के साथ – पाएं 30,000 से 32,000 पौधे प्रति एकड़ और भरपूर मुनाफा।

लक्ष्मी दादा G हाइब्रिड मक्का – हर हाल में साथ निभाए, हर बार टॉप उपज दिलाए। जब भी लगाओ, भरोसे के साथ लगाओ – लक्ष्मी दादा G ही लगाओ!

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मुख्य विशेषताएँ

  1. अधिक उत्पादन क्षमता
  2. रबी मौसम के लिए उत्तम (सितंबर से दिसंबर)
  3. विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में स्थिर प्रदर्शन
  4. तेज़ हवाओं में भी न गिरे – मजबूत जड़ और तना
  5. लंबे, एक समान और आकर्षक भुट्टे
  6. भारी और चमकदार दाने – बाजार में उच्च मूल्य

बीज पर आशा शक्ति का उपचार करने से फसल की शुरुआत ही मजबूत होती है। इससे जमाव तेज़ और समान होता है, पौधे मजबूत और स्वस्थ बनते हैं, और उनमें कीट व बीमारियों से लड़ने की अधिक शक्ति आती है। साथ ही, पौधों को बेहतर पोषण मिलता है जिससे फसल की बढ़त और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।

खेती की जानकारी

  1. पौधे की ऊँचाई: 200–210 सेमी
  2. परिपक्वता अवधि: बुवाई के 115-120 दिन बाद तैयार
  3. बीज दर: प्रति एकड़ 8 किलो
  4. दूरी: कतार से कतार 55–60 सेमी, पौधे से पौधे 20-25 सेमी
  5. बीज गहराई: 4–5 सेमी

खाद और पोषण प्रबंधन

अधिक उपज के लिए:

  1. प्रति एकड़ 4–5 टन सड़ी हुई गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालें।
  2. NPK (80:24:20) और 20 किलो जिंक सल्फेट प्रति एकड़ दें।
  3. नाइट्रोजन को तीन भागों में दें – बुवाई के समय, 30 दिन और 50 दिन बाद।

जलवायु

  1. 10°C से 35°C तक तापमान में उत्कृष्ट प्रदर्शन।
  2. रबी मौसम में उपयुक्त।
  3. दाने बनने की अवस्था में नमी बनाए रखना जरूरी है।

मुनाफा और बाज़ार लाभ

लक्ष्मी दादा G के दाने भारी, चमकदार और समान आकार के होते हैं, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम और अधिक मुनाफा प्राप्त होता है। यह किस्म उच्च शेलिंग प्रतिशत और बम्पर पैदावार देती है — जिससे किसानों की मेहनत का पूरा फल मिलता है।

किसान लक्ष्मी दादा G पर क्यों भरोसा करते हैं

  1. भरोसेमंद और परीक्षणित हाइब्रिड
  2. रोगों और कीटों के प्रति सहनशील
  3. मजबूत पौधा और उच्च उत्पादकता
  4. चमकदार, भारी और बाजार योग्य दाने
  5. विकसित और लॉन्च किया गया Asha Agrisciences Pvt. Ltd. द्वारा – 30 वर्षों का अनुभव और किसानों का विश्वास

आशा एग्री अपने “SEEDS FOR FULLFILMENT OF DREAMS“ के उद्देश के तहत विश्वास करती हैं की लक्ष्मी दादा G किसानों के सपने पूरा करने में एक और मददगार मक्का हाइब्रिड सिद्ध होगा!

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मक्का एक ऐसी फसल जिसे लगभग हर देश में उगाया जाता है और फ़ास्ट फ़ूड से लेकर कॉर्न फ्लौर तक ये बहुत इस्तेमाल होता है सामान्यतः मक्का मोटे अनाज की