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Onion Twister Disease: किसान मित्रों, इस समय प्याज की फसल पर जलेबी रोग और जड़ गलन जैसी खतरनाक बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि जलेबी रोग क्या है, इसके लक्षण कब दिखाई देते हैं, थ्रिप्स की इसमें क्या भूमिका है और इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है। साथ ही हम प्याज की जड़ गलन की समस्या और उसके प्रभावी नियंत्रण के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा करेंगे।
जलेबी रोग क्यों होता है और कब फैलता है
प्याज की फसल में जलेबी रोग सबसे ज्यादा बारिश वाले सीजन यानी खरीफ में देखने को मिलता है। लगातार बारिश और बादल छाए रहने से पौधों में क्लोरोफिल का निर्माण सही तरीके से नहीं हो पाता। इसके कारण पत्तियां कमजोर होकर पहले पीली पड़ने लगती हैं और बाद में गोल-गोल घूम जाती हैं। इसी कारण इस रोग को किसान जलेबी रोग के नाम से पहचानते हैं।
जब लगातार कई दिनों तक बारिश होती है और खेतों में नमी बनी रहती है तो यह रोग तेजी से फैलता है। वहीं यदि बारिश कम हो और बीच-बीच में धूप भी निकल आए तो इसका असर अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।

थ्रिप्स और नाइट्रोजन का संबंध
जलेबी रोग के फैलने में थ्रिप्स की भी अहम भूमिका होती है। ये कीट प्याज की नई पत्तियों का रस चूसते हैं जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं। इसके अलावा नाइट्रोजन खाद का अत्यधिक प्रयोग भी इस रोग को बढ़ाता है। बारिश के दौरान वातावरण से नाइट्रोजन की मात्रा पौधों को अधिक मिलती है और यदि किसान अतिरिक्त यूरिया डाल दें तो पत्तियां तो तेजी से बढ़ती हैं लेकिन कंद का विकास रुक जाता है। यही कारण है कि फसल कमजोर होकर बीमारियों की चपेट में आ जाती है।
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जलेबी रोग से बचाव के उपाय
अगर प्याज की फसल 30 से 40 दिन की अवस्था पार कर चुकी है तो यूरिया का प्रयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। इसकी जगह पोटेशियम सोनाइट का इस्तेमाल करें, जिससे कंद का विकास बेहतर होता है और पैदावार भी बढ़ती है।
थ्रिप्स नियंत्रण के लिए फिपोनिल 40% और इमीडाक्लोप्रिड 40% युक्त दवा का छिड़काव करना चाहिए। यह न केवल थ्रिप्स बल्कि अन्य रस चूसक कीटों पर भी असरदार है। फफूंदनाशक के रूप में ट्राईफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन 25% और टेबुकोनाजोल 50% युक्त दवा का प्रयोग करें, जो जलेबी रोग, पर्पल ब्लॉच और ब्लाइट जैसी बीमारियों को भी रोकता है। बेहतर परिणाम के लिए इन दवाओं के साथ चिपको गोंद मिलाना जरूरी है।

प्याज में जड़ गलन का बढ़ता खतरा
लगातार बारिश और खेत में पानी भर जाने से प्याज की जड़ों में गलन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जब पौधों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती तो वे सड़ने लगती हैं। इसके अलावा गीली मिट्टी में मौजूद फंगस सक्रिय होकर कंदों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। यही वजह है कि इस साल जड़ गलन और कंद सड़न की समस्या अधिक देखने को मिल रही है।
जड़ गलन को रोकने का तरीका
इस रोग को नियंत्रित करने का सबसे असरदार उपाय है सूडोमोनास फ्लोरोसेंस का प्रयोग। इसे सूखी रेत, वर्मी कंपोस्ट या गोबर खाद के साथ मिलाकर पौधों की जड़ों में डालें। इसके अलावा 200 लीटर पानी में घोलकर ड्रेंचिंग भी की जा सकती है। यह उपाय जैविक और सुरक्षित होने के साथ ही रोग नियंत्रण में बेहद प्रभावी है।
किसानों के लिए संदेश
किसान भाइयों, प्याज की फसल मेहनत और समय दोनों मांगती है। ऐसे में रोगों से बचाने के लिए समय पर सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। यदि आप शुरुआत से ही संतुलित खाद प्रबंधन और उचित दवाओं का प्रयोग करेंगे तो इन बीमारियों से फसल को सुरक्षित रख पाएंगे और बेहतर पैदावार हासिल कर सकेंगे।
Onion farming can be profitable
— Maanda Sianga (@TheYoungFarmer) September 15, 2023
When you select a good variety, good managememt practices, mostly importantly timing the market to get the best prices. pic.twitter.com/YW63JJ7Nt3
FAQs , Onion Twister Disease
प्याज की फसल में जलेबी रोग कब ज्यादा फैलता है?
यह रोग खरीफ सीजन में लगातार बारिश और बादल छाए रहने पर ज्यादा फैलता है।
जलेबी रोग के लक्षण क्या हैं?
पत्तियां पहले पीली पड़ती हैं और बाद में गोल-गोल घूमकर जलेबी जैसा आकार बना लेती हैं।
थ्रिप्स का जलेबी रोग में क्या रोल है?
थ्रिप्स पत्तियों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देते हैं और रोग को फैलाने में मदद करते हैं।
जलेबी रोग को रोकने के लिए कौन सी दवाएं उपयोगी हैं?
फिपोनिल 40% + इमीडाक्लोप्रिड 40% कीटनाशक और ट्राईफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन 25% + टेबुकोनाजोल 50% फफूंदनाशक असरदार हैं।
प्याज की जड़ गलन को कैसे रोका जा सकता है?
सूडोमोनास फ्लोरोसेंस का प्रयोग करके इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
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