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सहजन जिसकी भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अच्छी खासी डिमांड रहती है क्योकि सहजन के पत्ते व पत्तियों के कई सारे औषधि गुण पाए जाते है इस कारण किसान भाइयो को सहजन का मंडी थोक भाव काफी अच्छा देखने को मिलता है आपको सहजन का मंडी थोक भाव 50 से 60 रूपए प्रति किलो ग्राम आसानी से मिल जाता है इसलिए सहजन की खेती (sahjan ki kheti) हर किसब भाई के लिए फायदे का सौदा ही है

सहजन को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों से जाना जाता है। कहीं इसे मोरिंगा कहा जाता है, तो कहीं ड्रमस्टिक। कई इलाकों में इसे मुंगना भी कहा जाता है। यही कारण है कि moringa plant in hindi नाम से भी लोग इसे इंटरनेट पर खूब सर्च करते हैं।

हमारे एरिया में इसे मुन्गना नाम से बुलाया जाता है आपके एरिया में किस नाम से बुलाते है आप कमेंट में बता सकते है

सहजन की खेती (Sahjan ki Kheti ) के लिए उपयुक्त जलवायु व तापमान

सहजन की खेती लगभग भारत के सभी राज्यों में किसान भाई सफलतापूर्वक करते है जिन 5 राज्यों में सहजन का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है वे इस प्रकार है

तमिल नाडू , महारास्ट्र , गुजरात , मध्य प्रदेश , राजस्थान

भारत के कुल उत्पादन का 80% उत्पादन सिर्फ तमिलनाडु राज्य से होता है इन पांचो राज्यों की जलवायु अलग अलग है फिर भी यहाँ के किसान भाई सहजन की खेती सफलतापूर्वक करते है इससे एक बात तो साफ़ है की भारत के कई राज्यों में सहजन की खेती बड़ी आसानी से किसान भाई कर सकते है

अलग-अलग जलवायु होने के बावजूद इन राज्यों में सहजन की खेती सफल है। इससे यह साफ़ हो जाता है कि यह फसल भारतीय परिस्थितियों के लिए बेहद अनुकूल है। न्यूनतम 2 डिग्री और अधिकतम 47 डिग्री तापमान में भी सहजन का पेड़ अच्छी तरह विकसित हो जाता है। यही कारण है कि इसे एक ढीठ और सहनशील पौधा माना जाता है।

सहजन की खेती के लिए कौनसी किस्म का चुनाव करें

सहजन की देशी खेती से हमें 4 से 5 साल में उत्पादन देखने को मिलता है व कमर्शियल उद्देश्य से तैयार की गयी किस्मो से बीज बुवाई के 6 महीने के बाद से ही उत्पादन मिलने लगता है व साल में 2 बार उत्पादन मिलता है

कमर्शियल उद्देश्य से तैयार की गयी किस्मे कुछ इस प्रकार है – PKM -1 , PKM -2 , ODC -3

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आज के समय में PKM-1, PKM-2 और ODC-3 किस्में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। ODC-3 पर 2012 से 2017 तक रिसर्च हुई थी, जिसके बाद इसे बाजार में उतारा गया। moringa ki kheti के लिए ये किस्में कम समय में ज्यादा उत्पादन देती हैं।

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सहजन का पौधा रोपण का सही समय व तरीका

सहजन का पौधा रोपण का सही समय हा मानसून का सीजन यानी आप जुलाई व अगस्त महिना होता है आप सहजन के पौधों का पौधा रोपण आप 12 x 5 फीट ग्राफ लेकर करें यानी की लाइन से लाइन की दुरी 12 फीट व पौधे से पौधे की दुरी 5 फीट रखे

सहजन का बीज 1200 से 1500 रूपए kg के बीच आता है अगर आप बुवाई के समय बीज का उपयोग करते है तो सबसे पहले बीज उपचार करना चाहिए उसके बाद ही सहजन की नर्सरी लगाये , बीज उपचार के लिए आप carbendazim 50% 5 ग्राम प्रति kg प्रति एकड़ के हिसाब से बीज को उपचारित कर देना है

Sahjan ki Kheti आप पूरी तरह से जैविक खेती कर सकते है खाद में वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल करें वैसे तो सहजन के पौधे के ऊपर ना ही ज्यादा कीट व रोगों का अटैक देखने को मिलता है पर फिर भी इल्ली का अटैक होता है जिसे आप नीम आयल से इसे कण्ट्रोल कर सकते है

सहजन के पौधे का जिस भी खेत में पौधा रोपण करते है वहां पर जल भराव नहीं होना चाहिए गर्मियों में हर 10 दिन में अन्तराल पर सहजन के पौधों पर सिंचाई करें व सर्दियों में 20 से 25 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करें

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सहजन की खेती से उत्पादन व मंडी भाव

ट्रांसप्लांट के 4 से 5 महीने के बाद में फुल आने लगते है व 6 से 7 महीने के बाद में फल्लिया बनने लगती है आपको सहजन से साल में 2 बार उत्पादन देखने मिलता है पहला फरवरी व मार्च के समय व दूसरा सितम्बर व अक्टुम्बर महीने में देखने को मिलता है

फरवरी व मार्च के समय सहजन का सबसे अच्छा मंडी थोक भाव देखने को मिलता है लगभग 30 रूपए से लेकर 100 किलो के आसपास सहजन का मंडी थोक भाव मिल जाता है और सितम्बर , अक्टुम्बर महीने में सहजन का भाव 20 से 30 रूपए देखने को मिलता है

Sahjan ki Kheti से अच्छा उत्पादन लेने के लिए सहजन के पौधे की कटाई अवस्य करें ट्रांस्प्लान्डिंग के 4 से 5 महीने के बाद में हम कटाई कर सकते है या फिर आप एक बार इससे फसल ले ले उसके बाद भी कटाई कर सकते है ध्यान रखे की सहजन के पौधे की कटाई जरुर करते रहे

इसकी पत्तियों की टेबलेट बनायीं जाती है जिसे सुपर फ़ूड कहते है जो की कुपोषण को दूर करने इसका उपयोग किया जाया है यानी की सहजन के पौधे से हम 2 तरह से आमदनी ले सकते है इसके फल व पत्तियों को बेचकर लाभ ले सकते है

सहजन से दोहरी कमाई का मौका

सहजन सिर्फ़ फलियों के लिए ही नहीं, बल्कि पत्तियों के लिए भी जाना जाता है। इसकी पत्तियों से टैबलेट बनाई जाती हैं, जिन्हें सुपर फूड कहा जाता है। इससे कुपोषण दूर करने में मदद मिलती है।

सहजन के 1 पौधे से आप 1000 रूपए से लेकर 2500 रूपए तक की आमदनी कर सकते है इस तरह से आप अपने खेत में खाली पड़ी जमीन पर 20 पौधे भी लगाते है तो उन 20 पौधे से आप 10 हज़ार से 25 हज़ार रूपए की आमदनी कर सकते है वो भी बिना किसी लागत के क्योकि सहजन के पौधे में हमारी लागत बहुत ही कम आती है और इसकी देखरेख भी ज्यादा नही करना पड़ता है क्योकि यह एक ढीठ किस्म का पौधा है जो की हर तरह के वातावरण में फल फुल जाता है यही कारण है कि लोग यह भी सर्च करते हैं कि सहजन का पौधा कहां मिलेगा।

FAQs – सहजन की खेती से जुड़े सवाल

क्या सहजन की खेती कम पानी में हो सकती है?

हाँ, यह फसल कम पानी में भी अच्छी उपज देती है, बस जलभराव नहीं होना चाहिए।

सहजन की खेती कब से उत्पादन देना शुरू करती है?

कमर्शियल किस्मों में 6 महीने के अंदर उत्पादन शुरू हो जाता है।

क्या सहजन जैविक तरीके से उगाया जा सकता है?

बिल्कुल, वर्मी कम्पोस्ट और नीम ऑयल से इसे पूरी तरह जैविक रखा जा सकता है।

सहजन की सबसे ज्यादा मांग किस रूप में है?

फलियों और पत्तियों दोनों की मांग रहती है, खासकर औषधीय उपयोग के कारण।

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