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Fungicide for Paddy: धान की फसल हमेशा से किसानों के लिए गर्व और मेहनत की पहचान रही है, लेकिन इसके साथ रोगों का खतरा भी बड़ा सिरदर्द बन जाता है। इस लेख में हम आपको धान की फसल में उपयोग किए जाने वाले तीन बेहतरीन फंगीसाइड के बारे में बताएंगे। इनमें से किसी भी एक का स्प्रे करने पर फसल पर रोगों का असर नहीं होगा। साथ ही ये फंगीसाइड न सिर्फ रोगों पर काम करते हैं बल्कि पैदावार बढ़ाने और दानों की क्वालिटी सुधारने में भी बेहद असरदार साबित हुए हैं।

धान की फसल में लगने वाले प्रमुख रोग

धान की खेती में अक्सर कई तरह की बीमारियाँ देखने को मिलती हैं। इनमें सी ब्लाइट, लीफ ब्लास्ट, नेक ब्लास्ट, पेनिकल ब्लास्ट, फॉल्स स्मट और डर्टी पेनिकल जैसे रोग शामिल हैं। अगर समय पर इन पर काबू न पाया जाए तो यह पूरी फसल को बर्बाद कर सकते हैं। किसान भाइयों के लिए हर रोग की अलग-अलग दवा खरीदना संभव नहीं होता, इसलिए ऐसे फंगीसाइड की जरूरत होती है जो एक साथ सभी रोगों को नियंत्रित करे।

1. पहला फंगीसाइड: एमिस्टर टॉप

सिंजेंटा कंपनी का एमिस्टर टॉप धान की फसल के लिए एक भरोसेमंद नाम है। यह ब्रॉड स्पेक्ट्रम फंगीसाइड है जिसमें एजोक्सिस्टोबिन 18.2% और डिफेनाकोनाजोल 11.4% शामिल है। इसकी खासियत यह है कि यह लंबे समय तक रोगों पर नियंत्रण रखता है। फसल में इसका स्प्रे करने पर न केवल रोग दूर होते हैं बल्कि झंडे पत्ते मजबूत होते हैं और पौधे हराभरे नजर आते हैं। एक एकड़ में इसकी 200 एमएल मात्रा की जरूरत होती है और खर्च लगभग 1000 रुपये आता है।

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2. दूसरा फंगीसाइड: नेटिवो

बायर कंपनी का नेटिवो भी धान की फसल में बेहतरीन रिजल्ट देता है। इसमें टेबुकोनाजोल 50% और ट्राईफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन 25% मौजूद होता है। यह फंगीसाइड सिस्टमिक और ब्रॉड स्पेक्ट्रम दोनों गुणों से लैस है। इसका इस्तेमाल करने पर फसल रोगमुक्त रहती है और दानों की क्वालिटी भी निखर जाती है। इसके उपयोग से दाने चमकदार होते हैं और मंडी में अच्छी कीमत दिलाते हैं। एक एकड़ के लिए इसकी 150 ग्राम मात्रा पर्याप्त होती है, जिस पर करीब 1400 से 1500 रुपये तक खर्च आता है।

Fungicide for Paddy: धान की फसल को हर रोग से बचाएंगे ये 3 स्पेशल फंगीसाइड, बढ़ेगी पैदावार और चमकेगा दाना

3. तीसरा फंगीसाइड: टोजो

आईएल कंपनी का टोजो फंगीसाइड भी किसानों के बीच लोकप्रिय है। इसमें एजोक्सिस्टोबिन 11% और टेबुकोनाजोल 18.3% शामिल है। इसकी खासियत यह है कि यह प्रिवेंटिव और क्युरेटिव दोनों एक्शन पर काम करता है। यानी रोग लगने से पहले रोकथाम करता है और रोग लग जाने पर भी असरदार तरीके से नियंत्रण करता है। इसके फाइटोटॉनिक गुण फसल को हराभरा बनाए रखते हैं और दानों की चमक बढ़ाते हैं।

सही समय और उपयोग की विधि

धान की रोपाई के लगभग 40 से 50 दिन बाद इन फंगीसाइड का पहला छिड़काव करना चाहिए। एक बार छिड़काव करने के बाद 15 दिन के अंतराल पर दूसरा छिड़काव करने से और भी बेहतर परिणाम मिलते हैं। किसानों को हमेशा पानी की सही मात्रा के साथ इनका प्रयोग करना चाहिए ताकि पूरा खेत बराबरी से कवर हो सके।

फसल में अतिरिक्त लाभ

ये तीनों फंगीसाइड न केवल रोगों को रोकते हैं बल्कि धान की पैदावार बढ़ाने और पौधों को मजबूत बनाने का काम भी करते हैं। इनका असर फसल के झंडे पत्तों पर साफ नजर आता है। मजबूत झंडे पत्ते दानों तक ज्यादा पोषण पहुंचाते हैं, जिससे फसल की क्वालिटी शानदार होती है।

FAQs: Fungicide for Paddy

प्रश्न 1: धान की फसल में कौन-कौन से प्रमुख रोग लगते हैं?

उत्तर: सी ब्लाइट, लीफ ब्लास्ट, नेक ब्लास्ट, पेनिकल ब्लास्ट, फॉल्स स्मट और डर्टी पेनिकल प्रमुख रोग हैं।

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प्रश्न 2: एमिस्टर टॉप की एक एकड़ में कितनी मात्रा चाहिए?

उत्तर: एक एकड़ में 200 एमएल एमिस्टर टॉप की जरूरत होती है।

प्रश्न 3: नेटिवो फंगीसाइड का खर्च कितना आता है?

उत्तर: एक एकड़ के लिए लगभग 1400 से 1500 रुपये खर्च आता है।

प्रश्न 4: टोजो फंगीसाइड की खासियत क्या है?

उत्तर: यह प्रिवेंटिव और क्युरेटिव दोनों तरह से काम करता है और फसल को हराभरा बनाए रखता है।

प्रश्न 5: इन फंगीसाइड का छिड़काव कब करना चाहिए?

उत्तर: धान की रोपाई के 40 से 50 दिन बाद पहला स्प्रे और 15 दिन बाद दूसरा स्प्रे करना चाहिए।

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