Lobia ki Kheti Kaise Kare: (लोबिया की खेती ) कम लागत में ज्यादा मुनाफे की पूरी रणनीति

Getting your Trinity Audio player ready...

भारत में दलहनी फसलों में लोबिया की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह फसल कम समय में तैयार होती है और सब्जी, दाल व चारे—तीनों रूपों में उपयोगी है। पोषण की दृष्टि से लोबिया प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है, इसलिए इसकी बाजार में मांग बनी रहती है। सही तकनीक अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन और मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।

लोबिया की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

लोबिया गर्म मौसम की फसल है। इसके अच्छे अंकुरण और बढ़वार के लिए 17–18 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान अनुकूल माना जाता है। अत्यधिक ठंड या पाला फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। गर्मी और हल्की नमी वाली जलवायु में फसल तेजी से बढ़ती है, जिससे उपज में सुधार होता है।

भूमि का चुनाव और तैयारी कैसे करें

लोबिया की खेती के लिए जल निकास वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। भारी और जलभराव वाली भूमि से बचना चाहिए। खेत की तैयारी के लिए 1–2 बार गहरी जुताई करें। देशी हल या ट्रैक्टर दोनों से जुताई की जा सकती है। जुताई के बाद पाटा लगाकर खेत को समतल करें, जिससे बीज समान गहराई पर बोए जा सकें।

लोबिया की खेती कैसे करें (पूरी जानकारी) | Lobia ki Kheti Kaise Kare

उन्नत किस्मों का चयन

बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत किस्मों का चयन बहुत जरूरी है। सब्जी उद्देश्य के लिए पूसा कोमल और पूसा सुकोमल किस्में किसानों में काफी लोकप्रिय हैं। वहीं चारे के लिए यूपी-628 किस्म अच्छी मानी जाती है। सही किस्म का चुनाव क्षेत्र, मौसम और उपयोग के आधार पर करना चाहिए।

इसे भी पड़े : ईसबगोल में माहू कीट का जबरदस्त अटैक को एक ही स्प्रे से करे 100 % नियंत्रण

बीज की मात्रा और बीज उपचार

एक एकड़ खेत के लिए लगभग 7–9 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। बोनी से पहले बीज उपचार करना जरूरी है, जिससे फसल रोगों से सुरक्षित रहती है। बीज को 2 ग्राम मेंकोजेब प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित किया जा सकता है। इससे अंकुरण बेहतर होता है और शुरुआती रोगों का खतरा कम होता है।

Lobia ki Kheti Kaise Kare (लोबिया की खेती ) कम लागत में ज्यादा मुनाफे की पूरी रणनीति

खाद और उर्वरक प्रबंधन

अच्छी पैदावार के लिए खेत तैयार करते समय 2–3 ट्रॉली अच्छी सड़ी गोबर खाद मिलाना लाभकारी होता है। इसके साथ 7–8 किलोग्राम नाइट्रोजन और 15–20 किलोग्राम पोटाश प्रति एकड़ देना चाहिए। संतुलित पोषण से पौधों की बढ़वार मजबूत होती है और फलियों की संख्या बढ़ती है।

सिंचाई प्रबंधन

चूंकि लोबिया गर्मी की फसल है, इसलिए इसमें नियमित सिंचाई आवश्यक होती है। शुरुआती अवस्था में 2–3 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करें। बाद में 6–7 दिन में एक बार पानी देना पर्याप्त रहता है। जल की कमी से फूल झड़ सकते हैं, जिससे उपज प्रभावित होती है।

टॉनिक और वृद्धि促क का उपयोग

फसल में फूल और फलियों की संख्या बढ़ाने के लिए एमिनो एसिड या फ्लोरो एसिड जैसे टॉनिक का छिड़काव किया जा सकता है। सही समय पर स्प्रे करने से पौधे स्वस्थ रहते हैं और उत्पादन में स्पष्ट वृद्धि देखने को मिलती है।

Join whatsapp group Join Now
Join Telegram group Join Now

तुड़ाई का सही समय

बुवाई के लगभग 40–45 दिनों बाद पहली तुड़ाई की जा सकती है। तुड़ाई करते समय ध्यान रखें कि फलियां कोमल और पूरी तरह विकसित हों। समय पर तुड़ाई करने से बाजार में अच्छी कीमत मिलती है और अगली तुड़ाई के लिए पौधे प्रोत्साहित होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

लोबिया की खेती कब करना सबसे अच्छा रहता है?

गर्मी के मौसम में, जब तापमान स्थिर हो और पाले की संभावना न हो, तब बुवाई करना बेहतर रहता है।

lobia ki kheti kab ki jaati hai?

आमतौर पर फरवरी से मार्च और जून–जुलाई के बीच बुवाई की जाती है, यह क्षेत्र और मौसम पर निर्भर करता है।

एक एकड़ में लोबिया से कितनी पैदावार मिल सकती है?

सही प्रबंधन के साथ 50–70 क्विंटल हरी फलियों की उपज प्राप्त की जा सकती है।

क्या लोबिया की खेती कम लागत में संभव है?

हां, यह फसल कम लागत में तैयार होती है और जल्दी तैयार होने के कारण लाभकारी मानी जाती है।

इसे भी पड़े :

Leave a Comment