7–8 महीने में कमाई शुरू करने वाला चमत्कारी पेड़, एप्पल बेर की खेती से किसान बनें आत्मनिर्भर

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अगर आप ऐसी खेती की तलाश में हैं जिसमें कम जोखिम हो, मौसम की मार का असर न पड़े और कम समय में कमाई शुरू हो जाए, तो एप्पल बेर की खेती आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। यह ऐसा फलदार पौधा है जो देश के अधिकांश राज्यों में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है और 7 से 8 महीने के भीतर उत्पादन देना शुरू कर देता है। खास बात यह है कि एप्पल बेर का पौधा 2 डिग्री सेल्सियस से लेकर 45 डिग्री सेल्सियस तक तापमान सहन कर सकता है, इसलिए ठंडे और गर्म दोनों क्षेत्रों के किसान इसे अपना सकते हैं।

एप्पल बेर की खेती कहाँ और कब करें

एप्पल बेर की खेती भारत के लगभग सभी राज्यों में की जा सकती है। इसकी बुवाई के लिए मार्च का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी में यह पौधा बेहतर विकास करता है। समय पर बुवाई करने से पौधे जल्दी स्थापित होते हैं और उत्पादन भी समय पर मिलता है।

एक एकड़ में पौधों की संख्या और लागत

अगर आप एक एकड़ में एप्पल बेर की खेती करना चाहते हैं, तो पौधे से पौधे और कतार से कतार की दूरी 10×10 फीट रखें। इस दूरी पर एक एकड़ में लगभग 350 पौधे लगाए जा सकते हैं। नर्सरी में एप्पल बेर का एक पौधा आमतौर पर ₹70 से ₹100 के बीच उपलब्ध होता है। भारत में इसकी तीन प्रमुख किस्में लोकप्रिय हैं ग्रीन थाई एप्पल बेर, कश्मीरी रेड एप्पल बेर और बाल सुंदरी—जो बाजार में अच्छी मांग रखती हैं।

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कितने समय में उत्पादन और कितना फल

एप्पल बेर का पौधा बुवाई के 7–8 महीने बाद ही फल देना शुरू कर देता है। पहले साल एक पौधे से औसतन 15 किलो फल मिलता है। दूसरे साल उत्पादन बढ़कर 25–30 किलो प्रति पौधा हो जाता है, जबकि तीसरे साल एक पौधे से 60 किलो तक फल प्राप्त किया जा सकता है। यही कारण है कि एप्पल बेर की खेती को तेज़ी से अपनाया जा रहा है।

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कटाई-छंटाई और देखभाल का सही तरीका

अच्छा उत्पादन लेने के लिए पौधों की कटाई-छंटाई बेहद जरूरी है। फसल की हार्वेस्टिंग के बाद फरवरी तक फ्लावरिंग रुक जाती है। मार्च में पौधे की तय ऊंचाई पर सभी शाखाओं की छंटाई की जाती है। इसके बाद फंगीसाइड या गोबर-आधारित उपचार करना लाभकारी रहता है। जून में मानसून से पहले खाद डालने पर बारिश के साथ नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं। सही समय पर देखभाल करने से पौधा लंबे समय तक अधिक उत्पादन देता है।

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कितने साल तक मिलता है उत्पादन

एप्पल बेर का पौधा एक बार लगाने के बाद 12 से 15 साल तक लगातार उत्पादन देता है। यानी एक बार की मेहनत से लंबे समय तक स्थायी आय का स्रोत बन जाता है। यही वजह है कि एप्पल बेर की खेती छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी बेहद फायदेमंद है।

एक एकड़ में कुल उत्पादन का गणित

मान लीजिए एक एकड़ में लगाए गए 350 पौधों में से 300 पौधे पूरी तरह उत्पादन दे रहे हैं। पहले साल प्रति पौधा 15 किलो के हिसाब से कुल उत्पादन 45 क्विंटल होता है। दूसरे साल प्रति पौधा 30 किलो मानें तो उत्पादन 90 क्विंटल पहुंच जाता है। तीसरे साल प्रति पौधा 60 किलो के हिसाब से एक एकड़ में लगभग 180 क्विंटल उत्पादन मिल सकता है।

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कमाई कितनी होती है

एप्पल बेर की बाजार में मांग अच्छी होने के कारण इसके दाम भी आकर्षक रहते हैं। न्यूनतम ₹20 प्रति किलो और अच्छे बाजार में ₹40 प्रति किलो तक भाव मिल सकता है। पहले साल एक पौधे से 15 किलो फल पर ₹20 भाव मिलने पर ₹300 और ₹40 भाव मिलने पर ₹600 की कमाई होती है। दूसरे साल 30 किलो उत्पादन पर ₹20 भाव से ₹600 और ₹40 भाव से ₹1200 मिलते हैं। तीसरे साल 60 किलो उत्पादन पर ₹20 भाव से ₹1200 और ₹40 भाव से ₹2400 तक की कमाई संभव है। आने वाले वर्षों में एक पौधा औसतन ₹2000 से अधिक की आय देता है। एक एकड़ के स्तर पर देखें तो तीसरे साल ₹20 भाव पर भी लगभग ₹3.6 लाख की कमाई संभव है।

खाद और उर्वरक प्रबंधन

अगर आप जैविक तरीके से एप्पल बेर की खेती करना चाहते हैं, तो अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद या कंपोस्ट का उपयोग करें। पौधे की उम्र के अनुसार 2 किलो से 20 किलो तक गोबर की खाद दी जा सकती है। रासायनिक विकल्प में डीएपी, पोटाश और यूरिया का मिश्रण पहले साल 50–100 ग्राम प्रति पौधा पर्याप्त रहता है, जिसे उम्र के साथ धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।

इंटरक्रॉपिंग से अतिरिक्त कमाई

एप्पल बेर की कतारों के बीच खाली जगह में कम ऊंचाई वाली फसलें जैसे मेथी, पालक, धनिया, हल्दी उगाई जा सकती हैं। इससे मुख्य फसल के साथ अतिरिक्त आय भी मिलती है और जमीन का बेहतर उपयोग होता है।

मार्च में बुवाई करके केवल 7–8 महीने में कमाई शुरू करने वाली एप्पल बेर की खेती आज किसानों के लिए एक भरोसेमंद और लाभदायक विकल्प बन चुकी है।

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