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तरबूज गर्मी की ही एक फसल है और यह एक फल है इसीलिए इसकी खेती फल के रूप में की जाती है इसकी खेती व्यापारिक तौर पर की जाती है इसका बाहरी रंग हरा होता है और यह पकने के बाद अन्दर से लाल हो जाता है| अगेती में लगाईं गयी तरबूज की फसल में हमे जल्दी उत्पादन देखने को मिल जाता है लेकिन इस अगेती कि फसल को कैसे बिक्री योग्य बनाना है किस तरह से तैयार करना है यह सब हम जानेंगे इस आर्टिकल के माध्यम से | और अगेती में लगाई गयी तरबूज की फसल को ठण्ड में गिरने वाले पाले से किस तरह बचाए यह भी जानेंगे |

तरबूज की खेती से 70 दिनों में 3 से 5 लाख रूपए इस विधि से कमाए

अगेती में तरबूज की बुई आप दिसम्बर के अंतिम सप्ताह से जनवरी के अंतिम सप्ताह तक कर सकते है | फरवरी तरबूज की बुआई का सबसे उत्तम समय है और मार्च जब हम तरबूज की फसल लगाते है तो यह पछेती में आती है | वैसे भारत के कई राज्यों में नवम्बर के अंतिम सप्ताह और दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में इसकी बुआई होती है और ये राज्यों में ठण्ड के सीजन में तापमान ज्यादा निचे नहीं जाता है |

तरबूज की खेती से 70 दिनों में 3 से 5 लाख रूपए इस विधि से कमाए | तरबूज की खेती कब और कैसे करे

तरबूज की फसल को ठण्ड में गिरने वाले पाले से किस तरह बचाए

ठण्ड में गिरने वाले पाले से आप तरबूज की फसल को दो तरह से बचा सकते है पहला जब आप तरबूज की बुआई करे और तरबूज के पौधे आने लगे तो उन्हें लो टनल से ढक कर रखे और पुरे जनवरी माह तक ढक कर रखे और जब फरवरी का महिना आजाये और तापमान थोडा सामान्य होजाए तब आप लो टनल को हटा दे | दूसरा तरीका यह है कि आप जनवरी में तरबूज की नर्सरी तैयार कर ले और उन पौधों को भी लो टनल में उगाये और फरवरी के माह में उन पौधो का ट्रांसप्लांट खेतो में कर दे | इस तरह आप तरबूज की फसल को ठण्ड में गिरने वाले पाले से बचा सकते है |

तरबूज की खेती के लिए बिज बुआई और उन्नत किस्मे

तरबूज की खेती के लिए आप खेत को दो बार अच्छी तरह जुताई कर ले और मिटटी को एक दम भुर भूरी रखे फिर बेड मेकर की सहायता से बेड बना लीजिये एक बेड से दुसरे बेड के बिच की दुरी आप 5 फिट रखे और बेड में तरबूज के बिज की बुआई करे और आपके पास ड्रिप और मल्चिंग है तो और अच्छी बात है क्यूंकि मल्चिंग पेपर के उपयोग से हमे रोग व किट कम देखने को मिलता है और उत्पादन भी अच्छा प्राप्त हो जाता है |आप तरबूज के लिए सागर सीड की सागर किंग वैरायटी का उपयोग करे या फिर आप समर्थ वैरायटी ले सकते है |

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तरबूज कि फसल में लगने वाले किट ,रोग एवं उनके उपाय

ज्यादर हमे तरबूज की खेती में रस चुसक किट मांहो और तेला देखने के लिए मिलते है ये किट तरबूज की पत्तियों से र्स को चूसते है जिस कारण तरबूज की पत्तिया अन्दर की तरफ मुड जाती है और इनसे फसल को बचाने के लिए आप imidacloprid 70% ws 14 gram 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में छिद्कांव करें इसके अलावा हमे तरबूज की फसल में फल मक्खी का अटैक सबसे ज्यादा देखने को मिलता है और इसे नियंत्रित करने के लिए आप फेरोमेन ट्रैप का उपयोग कर सकते है आपको एक एकड़ के लिए 4 फेरोमेन ट्रैप लगेंगी और आप यह ट्रैप घर पर भी बोतल की सहायता से बना सकते है |

तरबूज कि खेती के लिए उत्तम मिटटी

वैसे तो तरबूज की खेती सभी तरह की मिटटी में की जा सकती है लेकिन इसके लिए रेतीली दोमट मिटटी सबसे उत्तम मानी जाती है और आपने अक्सर देखा होगा होगा की तरबूज की खेती नदी किनारे या तालाब किनारे सर्वाधिक की जाती है क्यूंकि इनके किनारे की मिटटी रेतीली और दोमट दोनों ही प्रकार की होती है जिससे तरबूज का उत्पादन अच्छा देखने को मिल जाता है |

तरबूज के फटने का कारण और इसका उपाय

तरबूज के फटने के दो कारण हो सकते है या तो आपकी मिटटी में बोरोन कीई कमी है या फिर आप असंतुलित मात्रा में सिंचाई कर रहे है इसके लिए आप बिज बुआई के पहले अपनी खेत की मिटटी की जाँच करा ले और संतुलित मात्रा में खाद व उर्वरक दे और अगर बोरोन की कमी है तो खेत की तैयारी के समय 4 किलो बोरेक्स प्रति एकड़ के हिसाब से जब आपकी तरबूज की फसल 45 दिन की होजाए तब बोरेक्स 20% 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग करे |

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