अमेरिका को फिर से भेजे जाएंगे भारतीय झींगे: टैरिफ में राहत से समुद्री उत्पादकों को बड़ी राहत

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एक बड़ी खुशखबरी लेकर आए हैं खासकर उन लोगों के लिए जो समुद्री उत्पादों से जुड़े हुए हैं। भारत अब एक बार फिर अमेरिका को 35,000 से 40,000 टन झींगे (श्रिम्प) भेजने की तैयारी में जुट चुका है। ये फैसला उस वक्त आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रस्तावित 26% टैरिफ को फिलहाल रोक दिया है और इसकी जगह अब सिर्फ 10% शुल्क ही लिया जाएगा।

टैरिफ में राहत से भारतीय निर्यातकों को मिली राहत

दोस्तों और भाइयों, समुद्री उत्पादों के निर्यातकों के लिए यह किसी सौगात से कम नहीं है। पहले जब अमेरिका ने 26% का भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, तो हजारों कंटेनर झींगे बंदरगाहों पर ही अटक गए थे। लेकिन अब राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 9 अप्रैल को इस फैसले को अस्थायी रूप से होल्ड पर रखने से लगभग 2000 कंटेनरों की शिपमेंट फिर से शुरू हो चुकी है।

अमेरिका को फिर से भेजे जाएंगे भारतीय झींगे: टैरिफ में राहत से समुद्री उत्पादकों को बड़ी राहत

अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा बाजार

भाइयों, ये जानना जरूरी है कि अमेरिका आज भी भारत के झींगे का सबसे बड़ा बाजार है, चाहे बात मात्रा की हो या मूल्य की। वित्त वर्ष 2023–24 में भारत ने अमेरिका को 2.7 बिलियन डॉलर के झींगे निर्यात किए हैं।

उद्योग के नेताओं की राय

सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव के एन राघवन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अब बहुत राहत है क्योंकि हम फिर से अमेरिका के अन्य झींगा निर्यातकों के बराबर आ गए हैं। जो शिपमेंट पहले रोक दी गई थी, अब उन पर दोबारा काम शुरू हो चुका है।

अस्थायी राहत, लेकिन उम्मीदें कायम

दोस्तों, ये राहत फिलहाल 90 दिनों के लिए दी गई है। इस दौरान भारतीय निर्यातकों को मौका मिलेगा कि वे पहले से तय ऑर्डरों को बिना अतिरिक्त शुल्क के पूरा कर सकें।

शुल्क संरचना पर एक नजर

फिलहाल अमेरिका भारतीय झींगा पर कुल मिलाकर 17.7% का कस्टम ड्यूटी लगाता है, जिसमें 5.7% काउंटरवेलिंग ड्यूटी और 1.8% एंटी-डंपिंग ड्यूटी शामिल है। हालांकि चीन को अभी भी 145% का भारी टैरिफ चुकाना पड़ रहा है।

भारत सरकार से उम्मीदें

भाइयों, महासचिव राघवन ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वे आगामी बातचीत में निष्पक्ष व्यापार शर्तों की मांग को प्रमुखता से रखें, ताकि भारतीय निर्यातकों को आगे भी कोई बड़ी चुनौती ना झेलनी पड़े।

डीडीपी समझौते से बची कंपनियों की जेब

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर भारतीय निर्यातक डीडीपी यानी डिलीवरी ड्यूटी-पेड समझौते के तहत काम करते हैं। इसका मतलब है कि अगर 26% का टैरिफ लागू हो जाता, तो सारी लागत भारतीय कंपनियों पर ही पड़ती।

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उम्मीद की नई किरण

तो दोस्तों, इस अस्थायी राहत ने उद्योग को न सिर्फ राहत दी है बल्कि आगे बढ़ने की नई उम्मीद भी जगाई है। अगर बातचीत सफल रही, तो भारत को स्थायी व्यापार लाभ मिल सकता है और लाखों किसानों व श्रमिकों का जीवन बेहतर बन सकता है।

Disclaimer: यह समाचार विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों और पीटीआई की रिपोर्ट पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी समय-समय पर बदल सकती है। कृपया ताज़ा अपडेट के लिए आधिकारिक घोषणाओं पर भी नज़र रखें।

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