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भारत में मछली पालन अब एक नई और आत्मनिर्भर दिशा की ओर बढ़ रहा है। लंबे समय तक विदेशी नस्लों पर निर्भर रहने के बाद अब सरकार ने स्वदेशी मछली पालन को प्राथमिकता देने का ठोस फैसला किया है। इसका सीधा लाभ देश के मछुआरों और मत्स्य किसानों को मिलेगा, जिनकी आय, रोजगार और स्थायित्व में बड़ा बदलाव आने वाला है।

भारत में देसी मछलियों की पहल

भारत की नदियों, तालाबों और समुद्री क्षेत्रों में मछलियों की जैव विविधता बेहद समृद्ध है। देश में 2800 से अधिक स्वदेशी मछली और शंख प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन अब तक मीठे पानी में रोहू, कतला और मृगाल तथा खारे पानी में कुछ चुनिंदा विदेशी प्रजातियों पर ही निर्भरता रही है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए सरकार ने स्वदेशी मछली पालन को राष्ट्रीय प्राथमिकता में शामिल किया है।

सरकार की नई रणनीति

नई नीति के तहत मुरैल, पाबदा, सिंघी, ऑलिव बार्ब, एशियन सिबास और स्वदेशी टाइगर झिंगा जैसी देसी प्रजातियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन मछलियों की बाजार में मांग अधिक है, कीमत बेहतर मिलती है और ये पोषण के लिहाज से भी अत्यंत लाभकारी हैं। सबसे अहम बात यह है कि अब इन प्रजातियों के बीज उत्पादन और पालन की तकनीक किसानों को आसानी से उपलब्ध हो रही है।

स्वदेशी मछली पालन से होगी बंपर कमाई, जानिए सरकार की नई रणनीति

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की अहम भूमिका

स्वदेशी मछली पालन को आगे बढ़ाने के लिए सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बड़े स्तर पर काम कर रही है। आईसीएआर के वैज्ञानिक उन्नत और गुणवत्तापूर्ण बीज विकसित कर रहे हैं। भुवनेश्वर में मीठे पानी की मछलियों और तमिलनाडु के मंडपम में समुद्री मछलियों के लिए विशेष प्रजनन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिससे किसानों को बेहतर बीज और आधुनिक तकनीक मिल सके।

फिशरी क्लस्टर से बढ़ेगा उत्पादन और रोजगार

देशभर में 34 विशेष फिशरी क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। उड़ीसा में झिंगा, तेलंगाना में मुरैल, त्रिपुरा में पाबदा और कश्मीर-लद्दाख में ट्राउट जैसे क्लस्टर न केवल उत्पादन बढ़ाएंगे बल्कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगे।

आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव

स्वदेशी मछलियों पर सरकार का यह फोकस किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत को भी मजबूती देगा। स्वदेशी मछली पालन अब केवल एक कृषि गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का माध्यम बनता जा रहा है।

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