गर्मी में टमाटर की खेती और 30 दिन में कमाइए लाखों, जानिए किसान की सीक्रेट ट्रिक

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गर्मी के मौसम में किसानों के लिए सबसे अधिक कमाई देने वाली फसलों में गर्मी में टमाटर की खेती का नाम सबसे ऊपर आता है। हालांकि यह फसल जोखिम वाली मानी जाती है, लेकिन यदि सही तकनीक, सही समय और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाया जाए तो यही खेती लाखों रुपये की आमदनी का जरिया बन सकती है। टमाटर से मिलने वाला मुनाफा पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि गर्मी के मौसम में हम कितना और कितने समय तक उत्पादन ले पाते हैं। इसलिए खेती शुरू करने से पहले हर पहलू को समझना बेहद जरूरी है।

गर्मी में टमाटर की खेती का सही समय

टमाटर की खेती में ट्रांसप्लांटिंग का समय उत्पादन को सीधे प्रभावित करता है। यदि फरवरी की शुरुआत में टमाटर के पौधों का खेत में ट्रांसप्लांट कर दिया जाए, तो मार्च के अंत से लेकर 15–20 मई तक लगातार 50 से 60 दिनों तक उत्पादन मिलता है। इसके विपरीत, यदि मार्च में ट्रांसप्लांटिंग की जाए तो उत्पादन अप्रैल के अंत से मई के मध्य तक केवल एक महीने के लिए ही सीमित रह जाता है। यही कारण है कि गर्मी में टमाटर की खेती में समय पर रोपाई सबसे बड़ा फैक्टर बन जाती है। फिर भी केवल एक महीने का उत्पादन भी नुकसानदेह नहीं होता, क्योंकि इस समय बाजार में टमाटर के भाव काफी ऊंचे रहते हैं।

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नर्सरी और पौधों की व्यवस्था कैसे करें

यदि आपकी नर्सरी पहले से तैयार है, तो फरवरी में ही पौधों का ट्रांसप्लांट कर देना सबसे बेहतर विकल्प है। नर्सरी उपलब्ध न होने पर बाजार से पौधे खरीदकर भी खेत में रोपाई की जा सकती है, जिनकी कीमत सामान्यतः एक से डेढ़ रुपये प्रति पौधा होती है। इसके अलावा फरवरी के पहले सप्ताह में कोकोपीट और प्रो-ट्रे के माध्यम से नर्सरी लगाकर, 25 दिन बाद मार्च के पहले सप्ताह में पौधों का ट्रांसप्लांट भी किया जा सकता है। इस स्थिति में उत्पादन भले ही एक महीने का मिले, लेकिन गर्मी में टमाटर की खेती फिर भी मुनाफे में रहती है।

पौधों की दूरी और संख्या से बढ़ता है उत्पादन

बरसात और ठंड के मौसम में टमाटर की वेजिटेटिव ग्रोथ अधिक होती है, इसलिए उस समय लाइन से लाइन की दूरी करीब 5 फीट रखी जाती है। लेकिन गर्मी में पौधों की बढ़वार सीमित रहती है। ऐसे में यदि दो लाइनों के बीच 4 फीट और पौधे से पौधे के बीच 1.5 फीट की दूरी रखी जाए, तो एक एकड़ में पौधों की संख्या बढ़ जाती है। अधिक पौधे होने का सीधा फायदा यह होता है कि कुल उत्पादन भी बढ़ता है। यही वजह है कि गर्मी में टमाटर की खेती का पैटर्न दूसरे मौसमों से अलग रखा जाता है।

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धनिया की इंटरक्रॉपिंग

गर्मी में टमाटर की खेती को सुरक्षित और लाभदायक बनाने के लिए धनिया की इंटरक्रॉपिंग एक बेहद असरदार तरीका है। टमाटर की दो लाइनों के बीच खाली पड़ी जगह में धनिया लगाने से खरपतवार नहीं उगते, कई कीट और रोग दूर रहते हैं और खेत में ठंडक बनी रहती है। धनिया की फसल 45 दिनों में तैयार हो जाती है और कटाई के समय उसे जड़ से निकालने पर एक बार की निराई-गुड़ाई का खर्च भी बच जाता है। इसके साथ ही धनिया से होने वाली आमदनी टमाटर की खेती की लागत तक निकाल देती है, जिससे गर्मी में टमाटर की खेती का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।

खाद प्रबंधन

अच्छे उत्पादन के लिए खाद प्रबंधन बेहद जरूरी है। खेत की तैयारी के समय बेड पर रोपाई से एक दिन पहले डीएपी, अमोनियम सल्फेट और म्यूरेट ऑफ पोटाश की संतुलित मात्रा डालनी चाहिए। इसके बाद 30 और 60 दिन की अवस्था पर यूरिया का प्रयोग सिंचाई के बाद करना चाहिए। फूल और फल बनने की अवस्था में माइक्रोन्यूट्रिएंट और वाटर सॉल्युबल फर्टिलाइजर का सही समय पर उपयोग करने से फलों का आकार, वजन और गुणवत्ता बेहतर होती है। सही खाद प्रबंधन से गर्मी में टमाटर की खेती में उत्पादन स्पष्ट रूप से बढ़ता है।

कम लेबर में खरपतवार नियंत्रण

टमाटर की फसल में खरपतवार निकालने के लिए अधिक लेबर की जरूरत नहीं होती। दो लाइनों के बीच खाली जगह में कल्टीवेटर की सहायता से आसानी से निराई की जा सकती है। इससे लागत कम होती है और खेत भी साफ रहता है।

उत्पादन

यदि एक एकड़ से केवल एक महीने में करीब 100 क्विंटल टमाटर का उत्पादन मिल जाए और बाजार भाव 40 से 50 रुपये किलो रहे, तो कुल आमदनी 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। यही कारण है कि थोड़े जोखिम के बावजूद गर्मी में टमाटर की खेती किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर बन जाती है।

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