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Sheath Blight Disease of Rice: धान की खेती कर रहे किसान भाइयों के लिए शीथ ब्लाइट सबसे खतरनाक रोगों में से एक है। यह रोग खासकर तब तेजी से फैलता है जब फसल एक महीने से ऊपर की अवस्था में होती है। इस लेख में हम विस्तार से बताएंगे कि शीथ ब्लाइट किस परिस्थिति में आता है, इसके शुरुआती और अंतिम लक्षण क्या हैं, यह किस वजह से फैलता है और इसके नियंत्रण के लिए कौन-कौन से जैविक और रासायनिक उपाय सबसे प्रभावी हैं। साथ ही जानेंगे कि शुरुआती अवस्था में किसान भाइयों को कौन-सी सावधानियां रखनी चाहिए ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके।

शीथ ब्लाइट रोग कब और क्यों आता है

धान की फसल में शीथ ब्लाइट आमतौर पर उन खेतों में ज्यादा देखा जाता है जहां पहले यह रोग हो चुका है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह मिट्टी जनित रोग है और फफूंद लंबे समय तक मिट्टी में जीवित रहकर अगले सीजन में पौधों को प्रभावित करता है। जब खेत में ज्यादा नमी होती है और पानी का स्तर पौधों की जड़ों के पास लंबे समय तक रहता है, तब यह रोग तेजी से फैलता है।

Sheath Blight Disease of Rice: धान में शीथ ब्लाइट रोग का इलाज मिला, जानिए कौन-सी दवा है सबसे असरदार

शीथ ब्लाइट रोग के लक्षण

इस रोग की शुरुआत सीट एरिया यानी पौधे के निचले हिस्से से होती है। शुरुआत में पत्तियों और तनों के पास अंडाकार भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, इन धब्बों के बीच सफेद फफूंद जैसी परत दिखने लगती है। सुबह के समय जब ओस जमती है, तो इन धब्बों पर सफेद धागे जैसी संरचना साफ नजर आती है। यह रोग धीरे-धीरे नीचे से ऊपर की ओर फैलता है और बाली तक पहुंच सकता है। एडवांस स्टेज में यह छोटे-छोटे भूरे रंग के दानों की तरह दिखाई देने लगता है, जो फसल को पूरी तरह खराब कर देता है।

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जैविक नियंत्रण के उपाय

यदि आपकी फसल एक महीने से ज्यादा की हो चुकी है, तो जैविक तरीके से नियंत्रण शुरू करना जरूरी है। इसके लिए खेत में गोबर खाद में मिलाकर ट्राइकोडर्मा जैसे बायोकंट्रोल एजेंट का प्रयोग करना चाहिए। यह मिट्टी में मौजूद फंगस को रोकता है और रोग फैलने की संभावना को कम करता है। शुरुआती अवस्था में 2% का छिड़काव 10 दिन के अंतराल पर तीन बार करने से काफी हद तक शीथ ब्लाइट पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

रासायनिक नियंत्रण और दवाओं का चयन

धान में शीथ ब्लाइट को रोकने के लिए बाजार में 50 से ज्यादा फफूंदनाशक और उनके कॉम्बिनेशन उपलब्ध हैं। लेकिन सही दवा का चयन ही सबसे जरूरी है। यदि रोग बहुत हल्की अवस्था में है, तो हेक्साकोनाजोल या टेबुकोनाजोल आधारित दवाओं का छिड़काव पर्याप्त है। लेकिन जब रोग बढ़ने लगता है, तो आजोक्सीस्ट्रोबिन और टेबुकोनाजोल का कॉम्बिनेशन ज्यादा असरदार साबित होता है। नजूल जैसे प्रोडक्ट को 375 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करने पर अच्छे नतीजे मिलते हैं। वहीं, गंभीर अवस्था में आजोक्सीस्ट्रोबिन आधारित दवाएं कारगर मानी जाती हैं।

किसानों को कब अलर्ट होना चाहिए

धान की फसल में शीथ ब्लाइट का खतरा सबसे ज्यादा तब बढ़ता है जब पौधा गोभ अवस्था में होता है और खेत में लगातार नमी बनी रहती है। इस अवस्था में यदि शुरुआती लक्षण नजर आएं, तो तुरंत दवा का छिड़काव करना चाहिए। देर करने पर यह रोग तेजी से ऊपर की ओर फैलकर पूरे पौधे को प्रभावित कर सकता है और फसल का 50% तक नुकसान कर सकता है।

FAQs

प्रश्न 1: शीथ ब्लाइट रोग धान की फसल में कब आता है?

उत्तर: यह रोग आमतौर पर फसल के 30 से 50 दिन की अवस्था और गोभ अवस्था में ज्यादा दिखाई देता है।

प्रश्न 2: शीथ ब्लाइट रोग की पहचान कैसे करें?

उत्तर: पौधे के निचले हिस्से में अंडाकार भूरे धब्बे और उन पर सफेद फफूंद जैसी परत दिखाई देती है।

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प्रश्न 3: शीथ ब्लाइट रोग को जैविक तरीके से कैसे रोकें?

उत्तर: गोबर खाद में ट्राइकोडर्मा मिलाकर खेत में डालें और 2% स्प्रे 10 दिन के अंतराल पर करें।

प्रश्न 4: शीथ ब्लाइट रोग की सबसे असरदार दवाएं कौन-सी हैं?

उत्तर: हेक्साकोनाजोल, टेबुकोनाजोल, आजोक्सीस्ट्रोबिन और उनके कॉम्बिनेशन शीथ ब्लाइट पर कारगर हैं।

प्रश्न 5: यदि शीथ ब्लाइट का अटैक ज्यादा हो तो क्या करें?

उत्तर: गंभीर अवस्था में नजूल या आजोक्सीस्ट्रोबिन आधारित कॉम्बिनेशन वाली दवाओं का छिड़काव करना चाहिए।

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