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बरसात के सीजन में लगायी गयी फुलगोभी की फसल और ठण्ड के सीजन में लगायी गयी फुलगोभी की फसल में जमीं आसमान का अंतर देखने को मिलता है बारिश के समय में जहा फुलगोभी की ग्रोथ कम होती है वही ठण्ड के सीजन में फुल गोबी की ग्रोथ ज्यादा देखने को मिलती है साथ ही साथ बारिश के सीजन में फुलगोभी के पौधे के ऊपर किट्रोवा रोगों का प्रकोप देखने मिलता है वही ठण्ड के सीजन में हमें कम देखने को मिलता है
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बारिश के सीजन में फुलगोभी का वजन 500 ग्राम के आसपास मिलता है और ठण्ड के सीजन में फुलगोभी का वजन 800 से लेकर 1kg तक देखने को मिलता है लेकिन ये सभी मुसीबत के बाद भी बारिश के सीजन में फुलगोभी का मंडी थोक भाव 25-50 रूपए किलो तक देखने को मिलता है यानी की बारिश के सीजन में लाखो की आमदनी करने के हिसाब से फुल गोबी की फसल किसान भाइयो के लिए सबसे अच्छा विकल्प है
बारिश के सीजन में फुलगोभी की खेत किस तरह से करें
बारिश के सीजन में फुल गोबी की सफल खेती करने के लिए हम इस 4 पॉइंट पर बात करेंगे
1. बारिश के सीजन के लिए कौनसे बीज का चुनाव करें
2. फुलगोभी की नर्सरी किस तरह से तैयार करें
3. फुलगोभी के पौधों का ट्रांसप्लांट किस तरह करें
4. बारिश के सीजन में फुलगोभी की फसल पर लगने वाले कीट और रोग
अंत में हम यह भी जानेगे की अगर हम बारिश के सीजन में 1 एकड़ जमीं पर फुलगोभी की फसल लगाते है तो हम इससे कितनी आमदनी कर सकते है
1. बारिश के सीजन के लिए कौनसे बीज का चुनाव करें
बारिश के सीजन में फुलगोभी बीज चुनाव के लिए हमारे पास 3 विकल्प है
1. Syngenta CFL-1522
2. Super Shigra
3. NHCF – 250
2. फुलगोभी की नर्सरी किस तरह से तैयार करें
बारिश के सीजन में फुलगोभी की फसल से उत्पादन लेने के लिए फुलगोभी की नर्सरी 15 मई से लेकर 15 जुलाई तक लगा सकते है व बारिश के सीजन में फुलगोभी की नर्सरी लगाने का सबसे उपयुक्त समय जून का महिना होता है बारिश के सीजन में फुलगोभी की नर्सरी क्यारिया बनाकर करे

- क्यारिया की लम्बाई 10 फीट व चौडाई 5 फीट रखे
- ध्यान रखे की हमें क्यारिया समतल बनाना है
- इन क्यारिया में गोबर की खाद का छिडकाव कर देना है छिडकाव करने के बाद मिटटी में मिला देना है
- इसके बाद फूलगोभी के बीजो का छिडकाव कर सकते है
- बीज बुवाई के बाद हल्की मिटटी की परत चड़ा देना चाहिए
- उसके बाद सिचाई कर सकते है
वैसे तो फुलगोभी की नर्सरी 25 से 30 दिन में ट्रांसप्लांट के लिए तैयार हो जाती है लेकिन फिर भी आप पौधे के उपाद 5 से 6 पत्तिया आ जाये और तने में थोडा कडापन आ जाये उस समय पर फुलगोभी के पौधों का ट्रांसप्लांट खेतो में करें
3. फुलगोभी के पौधों का ट्रांसप्लांट किस तरह करें
बारिश के सीजन में फुलगोभी के पौधों का ट्रांसप्लांट बेड बनाकर करें ट्रेक्टर की सहायता से बेड तैयार करें एक बेड से दुसरे बेड की दुरी 1.5 फीट रखे और बेड की चौडाई 1.5 फीट रखे और उचाई 14 से 16 इंच के आसपास रखना चाहिए एक बेड पर zigzag तरीके से 2 लाइन ले सकते है और एक पौधे से दुसरे पौधे की दुरी 1 फीट होना चाहिए
बारिश के सीजन के आप खरपतवार का विशेष ध्यान रखिये और समय समय पर आप खरपतवार को निकलते रहे ज्यादा खरपतवार के होने से फसल पर कई तरह के रोग व कीटो का प्रकोप देखने को मिलता है
4. बारिश के सीजन में फुलगोभी की फसल पर लगने वाले कीट और रोग
पहला कीट है Thrips (थाइसेनोप्टेरा) – इस कीट के अटैक के कारण फुलगोभी के पत्ते के ऊपर सफ़ेद दाने बनने लगते है जिससे हमारे फुलगोभी के पौधे के विकास दर में कमी आती है
फुलगोभी की मखी- यह कीट फुलगोभी की पत्ती और फुल दोनों पर अटैक करता है इसका लार्वा फुलगोभी के पौधे की पत्तियों को खराब कर देता है
कलेजो- यह कीट फुलगोभी के पौधे की जड़ो पर अटैक करता है
बैक्टीरियल – बारिश के समय पानी में ज्यादा देर रहने के कारण फुलगोभी के पौधे में ये रोग प्रभावित कर सकता है
इन रोग और कीटो से बचने के लिए आप समय समय पर पौधे के ऊपर Fungicides, Herbicides, और Insecticides का छिडकाव करना है और फुलगोभी की फसल पर छिडकाव के लिए स्प्रे schedule फिक्स करना है
बारिश में 1 एकड़ से फुलगोभी का उत्पादन
अगर आप बारिश के सीजन में फुलगोभी की फसल लगाते है और आपकी फुलगोभी की फसल खराब नहीं होती है तो आपको 1 एकड़ फुलगोभी की फसल से कम से कम 80 कुंटल तक उत्पादन देखने को मिलता है व बारिश के सीजन में फुलगोभी का हमें मंडी थोक भाव 25 रूपए से लेकर 50 रूपए किलो के आसपास देखने को मिलता है
फुलगोभी की फसल से मुनाफा
हम फुलगोभी का कम से कम मंडी भाव 25 रूपए लेते है
80 कुंटल = 1 कुंटल में 100 किलो होता है
25 रूपए पर किलो = 8000 x 25 = 2,00,000
इस तरह 1 एकड़ में हमारी आमदनी 2 लाख रूपए होती है ( कम से कम भाव रेट )
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पुरुषोत्तम बिसेन कृषि आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म sacchikheti.com के संस्थापक और कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्होंने B.Sc. एग्रीकल्चर में स्नातक किया है और वे किसानों के लिए स्वयं कृषि से जुड़ा कंटेंट लिखते हैं।
