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अनुष्का जायसवाल, 27 वर्षीय अर्थशास्त्र स्नातक, हिंदू कॉलेज, दिल्ली की छात्रा, भारतीय कृषि के परिदृश्य को बदल रही हैं। लखनऊ की रहने वाली अनुष्का ने मोहनलालगंज (लखनऊ से 40 किमी दूर) में आधुनिक तकनीकों से विदेशी सब्जियां उगाकर किसान और उद्यमी के रूप में एक मिसाल कायम की है। शहरी पृष्ठभूमि से ग्रामीण जीवन में किसान बनने तक का उनका सफर रूढ़ियों को चुनौती देता है और तकनीक-आधारित कृषि की संभावनाओं को दर्शाता है। उनकी कहानी दृढ़ता, नवाचार और भारतीय खेती की छवि बदलने के संकल्प की कहानी है।

शहरी जीवन से ग्रामीण सफलता तक का सफर

अनुष्का का पारिवारिक पृष्ठभूमि कृषि से जुड़ा नहीं था। उनके पिता व्यवसायी, भाई हेलिकॉप्टर पायलट, भाभी सॉफ्टवेयर इंजीनियर और बड़ी बहन वकील हैं। इसके बावजूद, अनुष्का ने खेती में अपनी राह बनाई। पहले उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में करियर तलाशा और एक साल तक यूपीएससी की तैयारी भी की, लेकिन उन्हें स्पष्ट दिशा नहीं मिली। फिर शौकिया तौर पर उन्होंने घर में गमलों में टमाटर और बैंगन उगाना शुरू किया, जिससे उनका खेती के प्रति जुनून जागा। 2021 में उन्होंने संरक्षित खेती और विदेशी सब्जियों की खेती की शुरुआत की, जो उनके क्षेत्र में एक अनदेखा क्षेत्र था।

जब अनुष्का ने लखनऊ छोड़कर गांव में खेती शुरू की, तब लोगों ने उनके निर्णय पर संदेह किया। उनके परिवार ने शुरुआत में हिचकिचाहट दिखाई, लेकिन बाद में उनका साथ दिया। उनके पिता ने, जिन्हें खेती का अनुभव था, कठिनाइयों के लिए चेतावनी दी लेकिन आर्थिक मदद दी। तीन वर्षों में अनुष्का ने न केवल अपनी लागत निकाली, बल्कि अपने उद्यम को लाभदायक व्यवसाय में बदल दिया।

विदेशी सब्जियों की उन्नत खेती

अनुष्का के 6 एकड़ के खेत में 3 पॉलीहाउस शामिल हैं, जहां वे लाल और पीले शिमला मिर्च, हरी और पीली जुकीनी, लेट्यूस, रेड कर्ली लेट्यूस, चीनी गोभी, लाल गोभी, ब्रोकोली, पाक चॉय और बीज रहित खीरे उगाती हैं। उन्होंने जानबूझकर विदेशी सब्जियों को चुना क्योंकि बाजार में प्रतिस्पर्धा कम और मांग अधिक थी। उनके उत्पाद पांच सितारा होटल, मॉल, रेस्टोरेंट, ब्लिंकिट, बिगबास्केट, लूलू और लखनऊ के स्थानीय कैफे व स्टोर्स में जाते हैं। उनके उत्पाद वाराणसी, कोलकाता और आसपास के बाजारों में भी पहुंच रहे हैं।

पहले साल में अनुष्का के खेत से 28 टन शिमला मिर्च का उत्पादन हुआ, जो दूसरे साल में बढ़कर 35 टन हो गया। उनका सफल मॉडल नियोजन, तकनीक और गुणवत्ता पर आधारित है। वे उत्पाद का आकार देखकर ग्रेडिंग करती हैं और खराब उत्पाद हटाती हैं, जिससे बाज़ार में उनकी सब्जियां अधिक दाम पर बिकती हैं और उनकी शेल्फ-लाइफ लंबी होती है।

टिकाऊ खेती में तकनीक का इस्तेमाल

अनुष्का ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और लो टनल जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं। ड्रिप सिस्टम (जैन इरिगेशन द्वारा स्थापित) से पौधों को सटीक पानी और पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे मजदूरी और उर्वरक लागत घटती है। मल्चिंग से खरपतवार कम होते हैं और पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं। सर्दियों में माइक्रोफाइबर कवर से वे ओस और ठंड से बचाती हैं।

वे पानी में घुलनशील उर्वरकों का वेंचुरी सिस्टम से उपयोग करती हैं, जिससे यूरिया व डीएपी जैसी पारंपरिक उर्वरकों की जरूरत नहीं पड़ती। डबल ड्रिप सिस्टम से वे एक पौधे से 3 किलो शिमला मिर्च उत्पादन का लक्ष्य रखती हैं, जो सामान्य उत्पादन (1.5 किलो) से दोगुना है।

महिला किसान के रूप में चुनौतियाँ

ग्रामीण और पुरुष प्रधान क्षेत्र में युवा महिला किसान के रूप में अनुष्का को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लोग उनके शहरी और युवा होने पर सवाल उठाते थे। लेकिन अनुष्का मानती हैं कि महिलाएं खेती में प्राकृतिक रूप से सक्षम होती हैं क्योंकि वे विवरण और देखभाल पर ज्यादा ध्यान देती हैं। उनकी टीम में अधिकतर महिला कर्मचारी हैं, जिनकी वे प्रशंसा करती हैं। अब लोग उनके खेत पर आकर उनकी तकनीकें सीखने लगे हैं और उनकी सफलता को सराहते हैं।

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सरकारी मान्यता और समर्थन

2023 में अनुष्का का टर्नओवर करीब ₹1 करोड़ रहा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी उपलब्धियों की सराहना की और 2024 के गणतंत्र दिवस पर उन्हें लखनऊ का प्रतिनिधित्व करने के लिए बुलाया, जहां उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा से मुलाकात की।

सरकारी सब्सिडी ने उनकी राह आसान की। उन्हें पॉलीहाउस के लिए 50% और ड्रिप सिंचाई के लिए 90% सब्सिडी मिली। नए नियमों के तहत किसानों को पहले बहुत कम भुगतान करना पड़ता है और शेष राशि सरकार सीधे कंपनी को देती है, जिससे उनके निवेश का बोझ कम हुआ।

भारतीय कृषि का भविष्य

अनुष्का मानती हैं कि खेती को कम दर्जे का पेशा मानना गलत है। वे कौशल विकास, तकनीक और व्यावसायिक सोच को बढ़ावा देती हैं। वे युवाओं को खेती को व्यवसाय की तरह देखने की सलाह देती हैं और लगातार सीखने की प्रेरणा देती हैं। भविष्य में वे हाइड्रोपोनिक्स (मिट्टी रहित खेती) शुरू करना चाहती हैं और मॉल व जिम में तैयार सलाद बॉक्स बेचने की योजना बना रही हैं। इसके अलावा, वे नर्सरी खोलने और प्रशिक्षण कार्यशालाएँ शुरू करने की योजना बना रही हैं।

युवा किसानों के लिए प्रेरणा

अनुष्का की कहानी भारतीय कृषि के लिए उम्मीद की किरण है। वे दिखाती हैं कि शिक्षित युवा तकनीक और नवाचार के जरिये खेती को लाभदायक बना सकते हैं। वे मानती हैं कि बागवानी व्यवसाय में अन्य व्यवसायों की तुलना में बेहतर रिटर्न मिलता है। उनका संदेश साफ़ है: तकनीक अपनाएं, सीखते रहें और रचनात्मक सोच के साथ कृषि की पूरी क्षमता का उपयोग करें।

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