सफेद मच्छर दिखा तो समझो खतरा, तुरंत अपनाएं ये 3 पावरफुल दवा

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किसान भाइयों, एक बेहद छोटा-सा कीट आपकी पूरी फसल को वायरस में बदल सकता है। यह कीट है वाइट फ्लाई यानी सफेद मच्छर। जब एक बार फसल वायरस में परिवर्तित हो जाती है, तो उसे नियंत्रित करना लगभग असंभव हो जाता है। यही कारण है कि आज वाइट फ्लाई किसानों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। पेस्टिसाइड कंपनियां भी इस कीट से परेशान हैं क्योंकि पारंपरिक दवाएं इस पर असर नहीं कर पा रही हैं।

वाइट फ्लाई क्या है और यह फसल को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

वाइट फ्लाई को सामान्यतः सफेद मच्छर भी कहा जाता है। यह पत्तियों के निचले हिस्से में छिपकर क्लोरोफिल चूसता है जिससे पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है। पत्तियों का आकार बिगड़ने लगता है और वे मुड़ने लगती हैं। धीरे-धीरे पत्तियों में इतनी कमजोरी आ जाती है कि पौधा वायरस से संक्रमित हो जाता है। ये वायरस दो प्रमुख प्रकार के होते हैं—सीएमवी (कुकुंबर मोज़ाइक वायरस) और वाईएमवी (येलो मोज़ाइक वायरस)। जब पूरी फसल इस वायरस की चपेट में आ जाती है, तब उसे बचा पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

सफेद मच्छर दिखा तो समझो खतरा, तुरंत अपनाएं ये 3 पावरफुल दवा

वाइट फ्लाई पर दवाएं क्यों नहीं असर करती?

1. कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता

जब किसान बार-बार एक ही दवा का प्रयोग करते हैं, तो वाइट फ्लाई में प्रतिरोधक क्षमता (resistance power) विकसित हो जाती है। इससे दवा का असर खत्म हो जाता है। इसलिए दवाओं को बदलते रहना जरूरी है।

2. गलत कीटनाशक का प्रयोग

वाइट फ्लाई एक चूसक कीट है, और इसके लिए विशेष प्रकार की दवाएं ही कारगर होती हैं। अगर कोई सामान्य कीटनाशक प्रयोग किया जाए, तो वह इस कीट पर प्रभावी नहीं होता।

3. स्प्रे तकनीक में गलती

सफेद मच्छर पत्तों के नीचे छिपा होता है, और अगर स्प्रे वहां तक न पहुंचे तो दवा बेअसर हो जाती है। इसलिए स्प्रे करते समय पौधों को अच्छे से भीगाना चाहिए, ताकि दवा निचले हिस्सों तक पहुंचे।

4. जीवन चक्र को नियंत्रित न करना

वाइट फ्लाई का जीवन चक्र चार चरणों में होता है—अंडा, निम्फ, प्यूपा और व्यस्क। यदि दवा इन सभी चरणों पर असर नहीं करती तो कीट दोबारा फसल को संक्रमित कर सकता है। इसलिए ऐसे कीटनाशकों का प्रयोग करना चाहिए जो सभी चरणों को नियंत्रित करें।

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सफेद मच्छर दिखा तो समझो खतरा, तुरंत अपनाएं ये 3 पावरफुल दवा

वाइट फ्लाई को नियंत्रित करने के लिए 3 प्रभावशाली कीटनाशक

पहला कॉम्बिनेशन: क्लास्टर + लेनो

इस संयोजन में दो दवाएं शामिल हैं:

  • पाइरीफ्लुकोनाजोन 20% डब्ल्यूजी (ब्रांड: क्लास्टर – टाटा, जिला – एंचिनो): यह कीटनाशक कांटेक्ट और इंजेक्शन दोनों तरीकों से काम करता है और कीट के सभी जीवन चरणों पर प्रभावी होता है।
    डोज: 200 ग्राम प्रति एकड़।
  • पाइरीपॉक्सिपेन 10% ईसी (ब्रांड: लेनो – सुमिटोमो): यह एक IGR (Insect Growth Regulator) है जो चूसक कीटों के विकास को रोकता है।
    डोज: 400 मिलीलीटर प्रति एकड़।

दोनों को मिलाकर स्प्रे करने से सफेद मच्छर पर शानदार असर होता है।

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दूसरा कॉम्बिनेशन: फ्लोनिका + स्पर्ट

  • फ्लोनिकामिड 50% डब्ल्यूजी (ब्रांड: उलाला – यूपीएल, पनामा – साल कंपनी, इडी – भारत): यह सिस्टेमिक और ट्रांसलामिनर दोनों प्रकार से काम करता है और कीट के सभी जीवन चक्रों को नियंत्रित करता है।
    डोज: 100 ग्राम प्रति एकड़।
  • स्पर्ट (एसिटामिप्रिड 25% + बायफेंथ्रिन 25%): यह मिश्रित कीटनाशक नर्वस सिस्टम को प्रभावित करके कीट को मारता है।
    डोज: 100 ग्राम प्रति एकड़।

इन दोनों को मिलाकर उपयोग करने पर अत्यधिक संक्रमित फसल में भी बेहतरीन परिणाम मिलते हैं।

तीसरा कॉम्बिनेशन: ट्रिपल ऐक्शन फॉर्मूला

इसमें एक ही उत्पाद में तीन तत्व मिलते हैं:

  • पाइरीपॉक्सिपेन 8% + डिनोटीफ्यूरन 5% + डाइफेनथुरान 18%
    (ब्रांड: रनफैन – बेस्ट एग्रो, त्रिदेव – जेयू, सुतन – सुदर्शन, टेकफ्लाई – ट्रॉपिकल एग्रो)

यह उत्पाद कांटेक्ट, सिस्टेमिक और ट्रांसलामिनर तीनों एक्शन पर काम करता है।
डोज: 330 मिलीलीटर प्रति एकड़।

यह एक ही दवा से सफेद मच्छर के सभी जीवन चरणों को नियंत्रित करता है। इस संयोजन के साथ अन्य कोई दवा मिलाने की आवश्यकता नहीं होती।

नया उत्पाद एपिकॉन:

बीएसएफ कंपनी का एपिकॉन (जिसमें डायमोप्रोपिराइड होता है) हाल ही में बाजार में आया है और यह ग्रुप 36 में आता है। हालांकि, हमने इसे फील्ड में टेस्ट किया लेकिन कोई विशेष परिणाम नहीं मिला।
डोज: 280 मिलीलीटर प्रति एकड़।

यदि आपके क्षेत्र में इसका असर देखा गया हो, तो आप इसका प्रयोग कर सकते हैं।

निष्कर्ष

अगर आप वाइट फ्लाई से अपनी फसल को बचाना चाहते हैं, तो ऊपर बताए गए तीनों में से किसी एक कॉम्बिनेशन का सही तरीके से इस्तेमाल करें। सही दवा, सही मात्रा और सही स्प्रे तकनीक ही वाइट फ्लाई जैसी घातक कीट से आपकी फसल को बचा सकती है। याद रखिए, एक बार वायरस लग जाने के बाद इलाज संभव नहीं होता, लेकिन रोकथाम आपके हाथ में है।

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