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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने देश की कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नई कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि अनुसंधान के माध्यम से भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में इस संस्था की अहम भूमिका रही है। आज देश की कृषि प्रगति के पीछे इसके वैज्ञानिकों और शोध संस्थानों का बड़ा योगदान माना जाता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का इतिहास
भारत में कृषि अनुसंधान की शुरुआत वर्ष 1819 में पुणे स्थित इंपीरियल बैक्टीरियोलॉजिकल प्रयोगशाला से मानी जाती है। इसके बाद वर्ष 1905 में बिहार के समस्तीपुर जिले के पूसा में इंपीरियल कृषि अनुसंधान संस्थान की स्थापना हुई, जिसने कृषि शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा दी।
वर्ष 1929 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का गठन किया गया। इसके बाद देशभर में वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए व्यापक नेटवर्क तैयार किया गया।

हरित क्रांति से लेकर दलहन क्रांति तक अहम योगदान
आईसीएआर द्वारा विकसित नई किस्मों, उन्नत तकनीकों और वैज्ञानिक खेती की बदौलत भारत में हरित क्रांति सफल हुई। इससे देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना और आयातक से निर्यातक देश बनने की दिशा में आगे बढ़ा।
आज केवल बासमती चावल के निर्यात से ही देश को हर वर्ष लगभग ₹33,000 करोड़ की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। इसके अलावा उन्नत बीजों और अनुसंधान के कारण दलहन उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
देशभर में मजबूत अनुसंधान नेटवर्क
वर्तमान समय में आईसीएआर के अंतर्गत देशभर में 102 अनुसंधान संस्थान, 75 कृषि विश्वविद्यालय और 721 कृषि विज्ञान केंद्र कार्यरत हैं। यह विशाल नेटवर्क किसानों तक नई तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और उन्नत कृषि पद्धतियों को पहुंचाने का काम करता है।
कृषि-जलवायु क्षेत्रों के अनुसार नई किस्मों, कृषि यंत्रों और आधुनिक फसल प्रणालियों का विकास भी इसी नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है।
पशुपालन और मत्स्य पालन में भी बड़ी उपलब्धियां
आईसीएआर ने केवल खेती ही नहीं, बल्कि पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। पशुओं की कई गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीन और आधुनिक जांच तकनीकों का विकास किया गया है।
मत्स्य पालन में उन्नत नस्ल, गुणवत्तापूर्ण बीज, रोग नियंत्रण और आधुनिक उत्पादन तकनीकों के कारण भारत आज जल कृषि उत्पादन में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है।
कृषि उत्पादन में कई गुना बढ़ोतरी
स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों की तुलना में आज भारत के कृषि उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई है। खाद्यान्न उत्पादन लगभग छह गुना बढ़ चुका है। बागवानी, दूध, अंडा और मत्स्य उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दूध उत्पादन के क्षेत्र में भारत दुनिया के प्रमुख देशों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास
आईसीएआर किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक तकनीक, लाभदायक फसल प्रणाली और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से करोड़ों किसानों तक नई जानकारी पहुंचाई जा रही है ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक खेती और आधुनिक तकनीकों के विस्तार से भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने का लक्ष्य और मजबूत होगा।

पुरुषोत्तम बिसेन कृषि आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म sacchikheti.com के संस्थापक और कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्होंने B.Sc. एग्रीकल्चर में स्नातक किया है और वे किसानों के लिए स्वयं कृषि से जुड़ा कंटेंट लिखते हैं।
