नमस्कार किसान भाइयों, यदि आप भी इस साल मूंग की खेती करने की योजना बना रहे हैं और चाहते हैं कि कम लागत में ज्यादा उत्पादन मिले, तो यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी है। मूंग की खेती ऐसी फसल मानी जाती है जो कम समय में तैयार होकर अच्छा मुनाफा देती है। लेकिन कई बार सही जानकारी के अभाव में किसान अपेक्षित पैदावार नहीं ले पाते। इसी कारण आज हम आपको मूंग की खेती से जुड़ी हर जरूरी जानकारी सरल भाषा में देने जा रहे हैं, जिसमें बुआई का सही समय, खेत की तैयारी, मिट्टी का चयन, उन्नत किस्में, खाद-उर्वरक, सिंचाई और रोग नियंत्रण की पूरी जानकारी शामिल है।
मूंग की खेती का सही समय कब है
किसान भाइयों, मूंग की खेती आप दो प्रमुख सीजन में कर सकते हैं, पहला खरीफ और दूसरा जायद। यदि आप खरीफ सीजन में मूंग की खेती कर रहे हैं, तो इसकी बुआई का सबसे उपयुक्त समय 1 जुलाई से 31 जुलाई के बीच माना जाता है। वहीं जायद सीजन में मूंग की खेती के लिए 1 फरवरी से 31 मार्च तक का समय सबसे अच्छा रहता है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में किसान 20 फरवरी से 20 अप्रैल के बीच भी मूंग की खेती करके शानदार उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। सही समय पर बुआई करने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और फसल पर रोगों का खतरा भी कम रहता है।

मूंग की फसल अवधि और तापमान की आवश्यकता
मूंग की खेती की फसल अवधि सामान्यतः 60 से 80 दिनों की होती है। यदि तापमान की बात करें, तो बुआई से लेकर कटाई तक 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। यही कारण है कि मूंग की खेती जायद और खरीफ दोनों सीजन में सफल रहती है।
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मूंग की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी
किसान भाइयों, मूंग की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा बलुई दोमट मिट्टी, काली मिट्टी, पीली मिट्टी, हल्की चिकनी और हल्की रेतीली मिट्टी में भी मूंग की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। ध्यान रखें कि मिट्टी में जलभराव नहीं होना चाहिए। मिट्टी का pH मान 5 से 7 के बीच हो और बुआई से लगभग 15 दिन पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर लेनी चाहिए, जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाए।
खेत की तैयारी कैसे करें
जिस खेत में आप मूंग की खेती करना चाहते हैं, वहां सबसे पहले गहरी जुताई करें। इसके बाद यदि संभव हो तो 6 से 7 टन प्रति एकड़ गोबर की सड़ी हुई खाद जरूर डालें। दलहनी फसलों में जैविक खाद का विशेष महत्व होता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल की जड़ें मजबूत बनती हैं।

बीज की मात्रा और बुआई की विधि
यदि आप जायद सीजन में मूंग की खेती कर रहे हैं, तो प्रति एकड़ 20 से 25 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। वहीं खरीफ सीजन में 10 से 15 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त रहता है। मूंग की बुआई छिटकाव विधि, देसी हल या सीड ड्रिल मशीन से की जा सकती है। सीड ड्रिल विधि से बुआई करने पर बीज सही गहराई में जाता है और अंकुरण बेहतर होता है।
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मूंग की खेती के लिए खाद और उर्वरक प्रबंधन
बुआई के समय मूंग की खेती में आप 50 किलोग्राम डीएपी प्रति एकड़ या एनपीके 12:32:16 का प्रयोग कर सकते हैं। इसके साथ 10 किलोग्राम दानेदार बेंटोनाइट सल्फर डालना बेहद फायदेमंद रहता है। जब फसल 20 से 25 दिन की हो जाए, तब 20 से 30 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ दिया जा सकता है। फसल की अच्छी बढ़वार के लिए ह्यूमिक एसिड और 19:19:19 का फोलियर स्प्रे भी लाभकारी माना जाता है। फूल आने की अवस्था में बायो पोटाश का प्रयोग करने से दानों की संख्या और वजन बढ़ता है।
मूंग की उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली किस्में
आज बाजार में मूंग की खेती के लिए कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं। पीडीएम 139 एक लोकप्रिय किस्म है, जो लगभग 60 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और 5 से 6 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन देती है। स्टार 444 किस्म 60 से 70 दिनों में तैयार होती है और 6 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार देती है। आईपीएम 205, जिसे विराट मूंग भी कहा जाता है, 65 से 70 दिनों में पकती है और 5 से 7 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन देने में सक्षम है। इसके अलावा सम्राट, सिखा मूंग, विशाल मूंग और जवाहर मूंग भी किसानों के बीच लोकप्रिय हैं।
सिंचाई प्रबंधन
मूंग की खेती में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। सामान्यतः 3 से 4 सिंचाई पर्याप्त रहती है। लेकिन फूल और दाना बनने की अवस्था में खेत में नमी बनाए रखना बहुत जरूरी होता है।
मूंग की खेती में रोग और नियंत्रण
मूंग की खेती में पत्ती धब्बा रोग, पीला चितकबरा रोग, अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा और उकठा रोग देखने को मिलते हैं। इनके नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% WP 300 ग्राम प्रति एकड़, एजॉक्सीस्ट्रोबिन 23% SC 180 एमएल प्रति एकड़ या उपयुक्त मिश्रित दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है। बुआई के तुरंत बाद 24 घंटे के भीतर पेंडीमेथालिन 30% EC का छिड़काव करने से खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है।
मूंग की खेती में खर्च और प्राफिट
एक एकड़ की बात करे तो बीज की मात्रा 7 kg का खर्च 15000 से 2000 रुपये आएगा वही खेत की तैयारी का खर्च आयेगा हमारा 4000 रुपये रासायनिक खाद व उर्वरक का खर्च आयेगा 1000 से 1200 रुपये खेत से मंडी तक का टेम्पो चार्ज 500 रूपए स्प्रे का भी खर्च हो वो है 1500 रूपए बीज बुवाई के लिए मशीन का खर्च 500 रूपए हार्वेस्टिंग के लिए हार्वेस्टर का खर्च आएगा 1500 रुपये |
एक एकड़ के खेत में मुंग की खेती के लिए लागत आयेगी 10 से 12 हजार रूपए | वही अब ये तो लगत हुई आब आपको इसमें प्राफिट आप आसानी से 20 से 25 हजार निकल सकते है |
निष्कर्ष
किसान भाइयों, यदि आप सही समय, उन्नत किस्म और वैज्ञानिक तरीके से मूंग की खेती करते हैं, तो कम समय में शानदार उत्पादन और अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। मूंग की खेती न केवल आपकी आय बढ़ाती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनाए रखती है।
FAQs: मूंग की खेती से जुड़े सवाल
मूंग बोने का सही समय क्या है?
मूंग की बुवाई जायद में 1 फरवरी से 31 मार्च और खरीफ में 1 जुलाई से 31 जुलाई के बीच करना सबसे अच्छा रहता है।
1 एकड़ में कितने किलो मूंग का बीज होना चाहिए?
जायद सीजन में 20–25 किलो और खरीफ सीजन में 10–15 किलो बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है।
सबसे अच्छा मूंग का बीज कौन सा है?
अधिक उत्पादन के लिए PDM-139, IPM-205 (विराट), STAR-444 और सम्राट मूंग सबसे अच्छी किस्में मानी जाती हैं।
मूंग में कौन सा खाद डालना चाहिए?
बुवाई के समय DAP 50 किलो या NPK 12:32:16, साथ में 10 किलो सल्फर देना लाभकारी रहता है।
मूंग की बढ़वार के लिए क्या करें?
फसल 20–25 दिन की होने पर 20–30 किलो यूरिया, साथ में ह्यूमिक एसिड और 19:19:19 का स्प्रे करने से बढ़वार अच्छी होती है।
मूंग की फसल कितने दिन में तैयार होती है
मूंग की फसल 50 से 55 दिन के अन्तराल में तैयार हो जाती है
मूंग की फसल में कितने पानी देना चाहिए
बसंत एवं ग्रीष्म ऋतु के समय 10-15 दिन के अन्तराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है।

पुरुषोत्तम बिसेन कृषि आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म sacchikheti.com के संस्थापक और कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्होंने B.Sc. एग्रीकल्चर में स्नातक किया है और वे किसानों के लिए स्वयं कृषि से जुड़ा कंटेंट लिखते हैं।
