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आज के इस लेख में हम PGR (Plant Growth Regulator) के बारे में विस्तार से बात करेंगे। किसान भाइयों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि PGR कितने प्रकार के होते हैं और उन्हें फसल की किस अवस्था में उपयोग करना सबसे लाभकारी रहता है। PGR को सही तरीके से समझने के लिए पहले हमें पौधों के अंदर पाए जाने वाले मुख्य हार्मोन के बारे में जानना होगा, क्योंकि इन्हीं हार्मोन को संतुलित करने का काम PGR करता है।
पौधों में पाए जाने वाले मुख्य हार्मोन
पौधों के अंदर मुख्य रूप से चार प्रकार के हार्मोन पाए जाते हैं ऑक्सिन, जिबरेलिक, साइटोकाइनिन और एथिलीन। ये सभी हार्मोन पौधे की वृद्धि, विकास, फूल, फल और पकने की प्रक्रिया को अलग-अलग तरीके से नियंत्रित करते हैं। इन्हीं हार्मोन के संतुलन के लिए अलग-अलग PGR का उपयोग किया जाता है।

ऑक्सिन हार्मोन और उसका कार्य
ऑक्सिन हार्मोन पौधे की कोशिका वृद्धि और जड़ विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह फल वर्गीय फसलों में फूलों को गिरने से रोकने में मदद करता है। ऑक्सिन हार्मोन के लिए बाजार में प्लानोफिक्स नाम का PGR उपलब्ध है, जो बायर कंपनी द्वारा बनाया जाता है और किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है।
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जिबरेलिक हार्मोन से बढ़ती है लंबाई
जिबरेलिक हार्मोन पौधे के तने की लंबाई बढ़ाने और संपूर्ण विकास में सहायक होता है। इस हार्मोन के लिए बाजार में प्रोजीब और होशी जैसे PGR उपलब्ध हैं, जो जिबरेलिक एसिड प्रदान करते हैं और फसल की बढ़वार को तेज करते हैं।

साइटोकाइनिन हार्मोन और हरियाली
साइटोकाइनिन हार्मोन पौधे में हरियाली बनाए रखने और कोशिका विभाजन में अहम भूमिका निभाता है। इसके लिए इसाबियोन और क्वांटिस जैसे PGR का उपयोग किया जाता है, जो फसल को स्वस्थ और हरा-भरा बनाए रखते हैं।

एथिलीन और ग्रोथ इनहिबिटर का रोल
एथिलीन हार्मोन फल पकाने में सहायक होता है, जिसके लिए एथरल जैसे PGR का प्रयोग किया जाता है। वहीं, अनावश्यक बढ़वार को रोकने और फुटाव बढ़ाने के लिए पैक्लोब्यूट्राजोल का उपयोग किया जाता है, जो कल्टार और टाबोली नाम से बाजार में उपलब्ध है।

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पुरुषोत्तम बिसेन कृषि आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म sacchikheti.com के संस्थापक और कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्होंने B.Sc. एग्रीकल्चर में स्नातक किया है और वे किसानों के लिए स्वयं कृषि से जुड़ा कंटेंट लिखते हैं।
