ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती से बढ़ेगा उत्पादन, सही समय पर करें ये जरूरी काम

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ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती आज किसानों के लिए अधिक मुनाफा देने वाली फसल बनती जा रही है, लेकिन सही तकनीक और समय पर देखभाल न करने से उत्पादन काफी प्रभावित हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में बुवाई के बाद शुरुआती 30 से 35 दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी दौरान फसल की उत्पादकता तय होती है।

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती: क्यों जरूरी हैं शुरुआती 30 दिन

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में कई किसान 60 से 65 दिन में 8 से 10 क्विंटल उत्पादन ले लेते हैं, जबकि कुछ किसान 70 से 80 दिन में भी केवल 3 से 5 क्विंटल तक ही सीमित रह जाते हैं। इसका मुख्य कारण शुरुआती दिनों में सही प्रबंधन न होना है। ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में समय पर सिंचाई, स्प्रे और खरपतवार नियंत्रण से ही बेहतर उत्पादन संभव है।

समय पर करें कीट नियंत्रण और स्प्रे

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में बुवाई के लगभग 8 से 10 दिन बाद कीट नियंत्रण के लिए पहला स्प्रे करना जरूरी होता है। इस समय रस चूसने वाले कीट और पत्तियां खाने वाले कीट फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। सही कीटनाशक का उपयोग कर इन कीटों को नियंत्रित करना जरूरी है, जिससे फसल की वृद्धि बेहतर हो सके।

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती से बढ़ेगा उत्पादन, सही समय पर करें ये जरूरी काम

खरपतवार नियंत्रण में न करें लापरवाही

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में खरपतवार सबसे बड़ी समस्या बन सकते हैं। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो ये फसल की वृद्धि को रोक देते हैं और उत्पादन घटा देते हैं। इसलिए शुरुआती 15 से 20 दिनों में खरपतवार नाशक का उपयोग करना बेहद जरूरी है।

सिंचाई और खाद प्रबंधन का रखें ध्यान

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में पहली सिंचाई लगभग 18 से 22 दिनों के बीच करनी चाहिए। इसके साथ संतुलित मात्रा में यूरिया और जिंक का उपयोग करने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है। सही समय पर खाद देने से फसल हरी-भरी रहती है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

30 दिन बाद करें पोषण स्प्रे

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में 30 दिन की अवस्था पर एनपीके का स्प्रे करना बेहद लाभकारी होता है। इससे पौधों में फूल और फलियों की संख्या बढ़ती है। यह तकनीक उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।

समय पर बुवाई से मिलेगा अधिक लाभ

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती के लिए समय पर बुवाई करना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार 15 अप्रैल से पहले बुवाई कर देने से बेहतर उत्पादन मिलता है। देर से बुवाई करने पर गर्मी और बारिश के कारण फसल को नुकसान हो सकता है।

किसानों के लिए लाभदायक विकल्प

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली फसल है। यदि किसान सही तकनीक अपनाते हैं, तो वे कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं और अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

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