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गेहूं की खेती कब और कैसे करे : विश्व में चावल की तरह ही गेंहु का भी उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है गेंहु के आटे से विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाये जाते है डबल रोटी, बिस्केट बनाई जाती है किसी व्यक्ति के बीमार होने पर डॉक्टर भी गेंहु के आटे की रोटी खाने की सलाह देते है गेंहु को प्रोटीन युक्त भोजन माना जाता है इसमें प्रोटीन, कार्बोहाईड्रेट, वशा, एवं फायबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है |

गेंहु के भूसे से कागज़ बनाया जाता है पशुओ को खिलाने में भी भूसे का उपयोग करते है भारत में गेंहु का सर्वाधिक उत्पादन उत्तरप्रदेश राज्य में किया जाता है विश्व में गेंहु उत्पादन के लिए प्रथम स्थान चीन, भारत, अमेरिका आता है |

Table of Contents

गेहूं की खेती कब और कैसे करे

गेंहु की खेती के लिए उचित समय 15 अक्टुम्बर से 15 नवम्बर माना जाता है वैसे तो दिसंबर तक बुवाई कर सकते है इस समय में खेती करने से बिज का जर्मिनेसन अच्छा होने के कारण उत्पादन अधिक होगा दोमट मिटटी गेंहु की फसल के लिए उत्तम मानी जाती है गेंहु की बुवाई के समय तापमान 20 से 25 डिग्रीसेल्सियस होना चाहिए |

भूमि का चयन:

गेंहु की खेती प्राय सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है परन्तु दोमट एवं जलोढ़ मिट्टी गेंहु के लिए उत्तम मानी जाती है इस मिटटी में अधिक उत्पादन होता है काली मिटटी में गेंहु के लिए सिंचाई की जरुरत कम पड़ती है मिटटी अधिक अम्लीय या छारीय उचित नहीं होती है इसका उत्पादन पर असर पड़ता है गेंहु की खेती के लिए मिटटी का पी. यच. मान 5.5-७.5 के मध्य उचित होता है |

गेहूं की खेती के लिए जबरदस्त वैरायटी

  • श्रीराम 303 – श्रीराम 303 को किसानों ने अपनी पहली पसंद बताया है
  • एचआई 8759 (पूसा तेजस / उषा तेजस)
  • DBW 187: इस वैरायटी का दूसरा नाम कारण बंधना
  • DBW 303 : यह भी गेहूं की काफी बढ़िया किस्म है
  • पूसा तेजस HI 8759 – ये वैरायटी मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा पाई जाती है
  • HD 2967 – यह वैरायटी तो काफी किसान भाइयो की खास वैरायटी है
गेहूं की खेती कैसे करे सही समय, सही तरीका और वैज्ञानिक देखभाल से पाएं बंपर उत्पादन

गेंहु की खेती कैसे करे (सम्पूर्ण जानकारी)

प्रति एकड़ खेत में 2 से 3 ट्राली गोबर की सड़ी खाद डालने के बाद 2 से 3 गहरी जुताई करना चाहिए एवं रोटावेटर से मिटटी को भुरभुरी एवं समतल करके जल निकासी का भी प्रबंध कर लेना चाहिए ताकि पानी ज्यादा समय तक गेंहु में ना रहे क्यों की उकठा रोग आने की संभावना रहती है अच्छे अंकुरण के लिए भुरभुरी मिटटी की आवश्यकता पड़ती है खेत में नमी सरकछड के लिए भूमि की जुताई समय पर करना आवश्यक होता है बुवाई से पहले खेत में पर्याप्त नमी हो एवं खरपतवार नस्ट होना चाहिए |

read also: चना की खेती कैसे करे

बीज की दर एवं चयन कैसे करे:

एक ही बीज को हमें प्रति वर्ष बुवाई नहीं करना चाहिए क्यों की इसका असर उत्पादन पर पड़ता है प्रति वर्ष नया बीज इस्तेमाल करना चाहिए एक एकड़ के लिए बीज की दर 50-60 किलोग्राम पर्याप्त माना जाता है एवं बुवाई से पहले पता होना चाहिए की खेत सिंचित है या नहीं उसी के हिसाब से ही बीज का चयन करना चाहिए |

बीज उपचार:

गेंहु की बुवाई से पहले बीज को फफुन्दनासक दवा से उपचारित करना चाहिए उपचारित करने के लिए कार्बेन्डाजिम+मेन्कोजेब का प्रयोग कर सकते है बीज उपचारित करने से हमारी फसल सुरुआती दौर से ही हरी भरी एवं स्वस्थ रहती है |

बुवाई की विधि:

गेंहु की बुवाई से पहले बिज को कार्बेन्डाजिम 12%+मेन्कोजेब 63%डब्ल्यु पी एवं क्लोरोपायरिफास 20 ई सी से उपचारित कर लेना चाहिए बिज उपचारित करने से हमारी फसल शुरु से ही स्वस्थ एवं हरी भरी रहेंगी बीज के बोने की गहराई 5 से ७ सेंटीमीटर के मध्य होना चाहिए वैसे गेंहु की बुवाई विभिन्न तरीके से की जाती है |

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छिड़काव विधि

हाथ के माध्यम से गेंहु के बीज को छिड़काव कर जुताई करके उसमे पाटा चला दिया जाता है यदि हमारे खेत में नमी नहीं है तो बुवाई के बाद सिंचाई कर सकते है ध्यान रहे की पानी ज्यादा समय तक खेत में नहीं रहना चाहिए नहीं तो गेंहु का अंकुरण सड़ सकता है इस विधी से बोने पर खरपतवार की निंदाई करने में कठिनाई होती है |

सीड्रिल द्वारा बुवाई– बड़े छेत्र में बुवाई की एक अच्छी विधि मानी जाती है इस विधि में बीज भी कम लगता है एवं समान दुरी एवं गहराई पर बुवाई होती है तथा समय भी कम लगता है जिससे की अंकुरण अच्छा होता है इस विधि से बुवाई करने से उत्पादन काफी अच्छा होता है |

खाद नियंत्रण:

गेंहु की बुवाई के समय प्रति एकड़ की दर से डी. ऐ. पी. 50-60 किलोग्राम, पोटाश 15-20 किलोग्राम, सल्फर 4-5 किलोग्राम, की दर से डालना चाहिए ! या डी. ऐ. पी. के स्थान पर एस. एस. पी. डालते है तो 100-120 किलोग्राम, यूरिया 15-20 किलोग्राम, पोटाश 20 किलोग्राम डालना चाहिए |

यदि एन. पी. के. के साथ जाते हो तो एन. पी. के. 60 किलोग्राम, सल्फर 5 किलोग्राम डालना चाहिए तथा दूसरी खाद के रूप में 30-35 दिन में 20-25 किलोग्राम युरिया तीसरी बार 20 किलोग्राम पोटाश, 20 किलोग्राम युरिया डालना चाहिए हमें खाद डालने पर सिंचाई आवश्यक रूप से करना चाहिए |

सिंचाई :

गेंहु में पहली सिंचाई 30 दिन के भीतर दूसरी सिंचाई 55 दिन के भीतर तीसरी सिचाई 75 दिन के भीतर एवं फुल आने की अवस्था में एक सिंचाई करना चाहिए सिंचाई से पहले मिटटी को देख लेना चाहिए नमी है या नहीं यदि नमी है तो सिंचाई को आगे बड़ा देना चाहिए सिंचाई करने के बाद खेत में पानी दीखता है तो 3-4 घंटे में पानी को बहार निकाल देना चाहिए ताकि पौधा सुरकछित रहे |

खरपतवारनाशक का प्रयोग:

गेंहु की खेती में खरपतवारनाशक का प्रयोग बुवाई के 2-3 दिन में पेंडीमेथालिन 30%ई सी एक लीटर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे कर सकते है ताकि खरपतवार होने से बचा जा सकता है या बुवाई से 30-40 दिन के मध्य मेटाक्सुरान 1.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर स्प्रे कर देना चाहिए |

बिमारी एवं कीट:

गेंहु की फसल में अधिकाँश भूरा रतुआ, पीला रतुआ, काला रतुआ एवं दीमक देखने को मिलती है इनकी पहचान निम्न प्रकार से है,

भूरा रतुआ- पत्तियों की उपरी सतह पर नारंगी रंग के सुई की नोक के समान बिंदु होते है गर्मी बड़ने पर इन धब्बो का रंग पत्तियों की निचली सतह पर काला हो जाता है |

पीला रतुआ- यह पत्तियों पर पीले रंग की धारियों के रूप में देखने को मिलती है जो की पत्तियों को धीरे धीरे पीला कर देते है कल्ले निकलने वाली अवस्था में आने से दाने सही नहीं बन पाते है एवं वजन में हलके होते है यह रोग तापमान बड़ने पर कम हो जाता है

काला रतुआ- गेंहु की फसल में तने एवं पत्तियों पर चाकलेट रंग के धब्बे दिखाई देते है |

रोकथाम:

किसान को खेत का निरीक्षण करते रहना चाहिए रोकथाम के लिए प्रोपीकोनाजोल 25%ईसी 250 मिलीलीटर एवं क्लोरोपयरिफास 50%+सायपर्मेथ्रिन 5%ईसी 350 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से छिडकाव कर देना चाहिए |

निष्कर्ष:

गेंहु एक विश्व स्तर की अनाज की फसल है इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने में करते है गेंहु का उत्पादन अच्छा हो रहा है जिससे किसानो की आय के साथ आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है गेंहु एक कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फायबर का अच्छा स्रोत माना जाता है |

किसी व्यक्ति के बीमार होने पर डॉक्टर के द्वारा कुछ दिनों के लिए अन्य खाद्य वस्तुओ को खाने से मना किया जाता है लेकिन गेंहु को उसके आटे की रोटी खाने के लिए बताया जाता है गेंहु की खेती को हमें जैविक खेती के रूप में करना चाहिए जिससे हमारी खेती लम्बे समय तक सुरक्छित रहे साथ ही गेंहु को खाने से मनुष्य को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है |

FAQ : गेंहु की खेती से जुड़े सवाल एवं उनके जवाब

Q : गेहूं की बुवाई का सही समय क्या है?

Ans : 15 अक्टुम्बर से 20 नवम्बर उचित समय होता है

Q : गेहूं में कौन कौन से खाद डालना चाहिए?

Ans : प्रति एकड़ बुवाई के समय 50-60 किलोग्राम डी.ऐ.पी., 15-20 किलोग्राम पोटाश, 4-5 किलोग्राम सल्फर एवं दुसरी खाद के रूप में 30-35 दिन में 20-25 किलोग्राम युरिया तथा तीसरी खाद 20 किलोग्राम पोटाश, 20 किलोग्राम यूरिया फुल आने की अवस्था में डालना चाहिए |

Q : गेहूं की फसल में कितने दिन में पानी देना चाहिए?

Ans : बुवाई के 30 दिन के भीतर पहली, 55 दिन में दूसरी एवं 75 दिन में तीसरी तथा 110 में चौथी सिंचाई करना चाहिए |

Q : गेहूं की फसल कितने दिन में पकती है?

Ans : गेहूं की फसल सामान्यतः किस्म और मौसम के अनुसार 120 से 140 दिन में पककर तैयार हो जाती है।

Q : 1 एकड़ में गेहूं कितना होना चाहिए?

Ans : सही खेती करने पर एक एकड़ में औसतन 18 से 25 क्विंटल गेहूं उत्पादन मिल सकता है।

Q : गेहूं की खेती में खाद की मात्रा कितनी होनी चाहिए?

Ans : प्रति एकड़ गेहूं की खेती में संतुलित रूप से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश देना आवश्यक होता है।

Q : सबसे महंगा गेहूं कौन सा है?

Ans : सरबती गेंहु |

Q : गेहूं की खेती में खाद की मात्रा कितनी होनी चाहिए?

Ans : प्रति एकड़ गेहूं की खेती में संतुलित रूप से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश देना आवश्यक होता है।

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