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अगर आपने गेहूं की फसल लगा रखी है और आपके मन में यह सवाल है कि दूसरी खाद में क्या डालें या 40 दिन से ऊपर की फसल में कौन-सी खाद सबसे सही रहेगी, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। गेहूं की दूसरी खाद दरअसल वह आखिरी मौका होती है, जब किसान फसल में कल्लों की संख्या बढ़ाकर सीधे उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इस समय पौधा अपनी पूरी ऊर्जा नए कल्ले बनाने और तेजी से बढ़वार में लगाता है। यदि इस अवस्था में सही पोषक तत्व नहीं मिले, तो पौधे की ग्रोथ रुकने लगती है और इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ता है। इसलिए गेहूं की दूसरी खाद को हल्के में लेना सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है।

40–45 दिन की फसल में पोषण की सही जरूरत

अधिकांश किसान पहली खाद और पहला पानी देने के बाद यह मान लेते हैं कि फसल अच्छी दिख रही है, इसलिए अब ज्यादा खाद की जरूरत नहीं है। लेकिन 40 से 45 दिन की अवस्था में पौधे की मांग सबसे ज्यादा होती है। इसी समय सही पोषण मिलने पर कल्ले मजबूत बनते हैं और आगे चलकर बालियां अच्छी भरती हैं। यदि इस चरण में खाद की कमी रह गई, तो चाहे बाद में कितना भी प्रयास कर लिया जाए, नुकसान की भरपाई संभव नहीं हो पाती।

दूसरी खाद में यूरिया का सही उपयोग

दूसरी खाद में यूरिया का उपयोग बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इसमें मौजूद 46 प्रतिशत नाइट्रोजन गेहूं की फसल के वनस्पतिक विकास में सीधी भूमिका निभाता है। नाइट्रोजन से पौधे में क्लोरोफिल तेजी से बनता है, जिससे पौधा ज्यादा भोजन तैयार करता है। यही भोजन आगे चलकर प्रोटीन निर्माण और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है, जिससे प्रति पौधा कल्लों की संख्या बढ़ती है और फसल में गहरा हरापन आता है। यदि पहली खाद में यूरिया दिया जा चुका है, तो दूसरी खाद में 20 से 25 किलो यूरिया प्रति एकड़ पर्याप्त रहता है।

गेहूं की दूसरी खाद का सही तरीका, 40 दिन बाद यह गलती की तो पैदावार हो जाएगी आधी

यूमिक एसिड से जड़ों को दें ताकत

यूरिया के साथ दूसरी खाद में यूमिक एसिड मिलाना बेहद फायदेमंद रहता है। यूमिक एसिड पौधे की जड़ों की वृद्धि को तेज करता है, जिससे पौधा मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है। इसके साथ ही यह मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार सिंचाई की जरूरत कम होती है। मजबूत और फैली हुई सफेद जड़ें फसल की अच्छी ग्रोथ और ज्यादा कल्लों की गारंटी होती हैं। गेहूं की दूसरी खाद में यूमिक एसिड 2 किलो प्रति एकड़ की दर से उपयोग करना बेहतर रहता है।

दीमक से बचाव भी है उतना ही जरूरी

40–45 दिन की गेहूं की फसल में दीमक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। यदि दीमक एक बार फसल में लग जाए, तो पौधे को अंदर से खोखला कर देती है और भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में फिप्रोनिल 0.3% जीआर आधारित उत्पाद का उपयोग बेहद प्रभावी माना जाता है। यह संपर्क और सिस्टमिक दोनों तरह से काम करता है, जिससे दीमक पर तुरंत असर पड़ता है और फसल लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। इसका उपयोग 8 से 10 किलो प्रति एकड़ की दर से किया जा सकता है।

सही समय, सही खाद = ज्यादा पैदावार

यदि किसान भाई समय पर गेहूं की दूसरी खाद सही मात्रा और सही संयोजन में देते हैं, तो फसल की ग्रोथ मजबूत होती है, कल्लों की संख्या बढ़ती है और अंत में उत्पादन में साफ बढ़ोतरी देखने को मिलती है। यही वजह है कि दूसरी खाद को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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