Kheti Badi: गेहूं की पहली सिंचाई में डालें ये खाद, एक पौधे में 50 तक कल्ले बनाने का फार्मूला आया सामने

Kheti Badi: गेहूं की पहली सिंचाई में डालें ये खाद, एक पौधे में 50 तक कल्ले बनाने का फार्मूला आया सामने

Kheti Badi: गेहूं की पहली सिंचाई के सही समय, खादों के संयोजन, यूरिया न मिलने पर उसके विकल्प, माइकोराइजा और ह्यूमिक एसिड की वास्तविक उपयोगिता, दो वैरायटी के तुलनात्मक परिणाम और जिंक सल्फेट व सल्फर की भूमिका का विस्तार से वर्णन किया गया है। किसान इंद्रपाल यादव ने अपने खेत से बताया कि बिना सिंचाई किए ही उनकी फसल एक पौधे में 10 तक कल्ले बना चुकी है, और पहली सिंचाई के साथ सही खाद डालने पर अगले 10–12 दिनों में 40–50 कल्ले तक बन सकते हैं।

पहली सिंचाई में कौन-सी खाद दें और कब दें

इंद्रपाल बताते हैं कि उनका गेहूं 30 दिन के बाद पहली सिंचाई पर पहुंचा है और इस समय नाइट्रोजन सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। अगर किसान को यूरिया न मिले तो अमोनियम सल्फेट इसका बेहतर विकल्प है, जिसमें नाइट्रोजन और सल्फर दोनों होते हैं। सिंचाई से पहले जिंक सल्फेट और सल्फर डालने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और कल्ले तेजी से बढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि नरम और भुरभुरी मिट्टी वाले खेतों में इस प्रक्रिया के परिणाम और भी बेहतर देखने को मिलते हैं।

Kheti Badi: गेहूं की पहली सिंचाई में डालें ये खाद, एक पौधे में 50 तक कल्ले बनाने का फार्मूला आया सामने

माइकोराइजा और ह्यूमिक एसिड क्या वाकई जरूरी हैं?

किसानों के सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले सवाल का जवाब देते हुए इंद्रपाल ने स्पष्ट कहा कि माइकोराइजा हर खेत में ज़रूरी नहीं है। अगर खेत में जड़ें पहले से अच्छी चल रही हों और पौधों में कोई रुकावट न हो, तो माइकोराइजा पर खर्च बिल्कुल अनावश्यक है। उन्होंने कहा कि इसे केवल उन्हीं खेतों में इस्तेमाल किया जाए जहां जड़ें कमजोर हों, मिट्टी भारी हो या फसल लगातार पीली पड़ती हो।

खादों का सही मिश्रण और उपयोग का तरीका

उन्होंने किसानों को चेताया कि माइकोराइजा को केमिकल इंसेंटिसाइड या फंगीसाइड के साथ कभी न मिलाएं। यूरिया और अमोनियम सल्फेट के साथ जिंक सल्फेट और सल्फर मिलाकर सिंचाई से पहले देना प्रभावी माना जाता है। यूरिया को आधा सिंचाई से पहले और आधा सिंचाई के बाद डालना लीचिंग रोकने और बेहतर अवशोषण के लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन खेतों में दीमक या व्हाइट ग्रब की समस्या हो वहां कॉन्फिडोरिया और क्लोरोपाइरफोस का उपयोग अनिवार्य है।

खरपतवार नियंत्रण

इंद्रपाल ने कहा कि सिंचाई के बाद खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं। जहां चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार हों वहां मेट सल्फ्यूरॉन मिथाइल का उपयोग प्रभावी है। जिन खेतों में जई या मंडूसी की समस्या हो वहां टॉपिक और मेट सल्फ्यूरॉन मिथाइल का संयोजन लाभकारी है।

मई आपको इंद्रपाल यादव की खेती का सफ़र शेयर किया है इस विडियो के माध्यम से हलाकि इस विडियो में उन्होंने प्याज की खेती के बारे में बताया है आप यह विडियो देखकर खेती मॉडल समझ सकते है

FAQs: गेहूं की पहली सिंचाई से जुड़े सामान्य सवाल

यूरिया न मिलने पर क्या विकल्प है?

अमोनियम सल्फेट एक उत्कृष्ट विकल्प है जिसमें 21% नाइट्रोजन और 24% सल्फर होता है।

क्या माइकोराइजा जरूरी है?

केवल तभी जब खेत में जड़ें कमजोर हों या मिट्टी में संरचना की कमी हो।

सिंचाई से पहले कौन-कौन से खाद देना चाहिए?

जिंक सल्फेट और सल्फर सिंचाई से पहले देना सबसे लाभकारी है।

एक पौधे में 40–50 कल्ले कैसे बनते हैं?

समय पर सिंचाई, नाइट्रोजन का सही स्रोत, जिंक व सल्फर का उपयोग और खरपतवार नियंत्रण कल्ले निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं

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